कोरोना उपचार की व्यवस्थाओं में निरंतर बढ़ोत्तरी

भोपाल :  अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने और संक्रमित व्यक्तियों के समुचित उपचार के सभी प्रंबध किये जा रहे हैं। कोरोना सस्पेक्ट की समय पर पहचान, क्वारेंटाइन की व्यवस्था और समय पर टेस्टिंग की प्राथमिकताओं पर प्रदेश में कार्य हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा कोरोना नियंत्रण एवं उपचार के लिये किये जा रहे इन प्रयासों में समाज को भी अहम् भूमिका निभाना होगी। प्रदेश में अब रेपिड एंटीजन टेस्ट प्रारंभ किये जा रहे हैं। अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य ने रविवार को समन्वय भवन में मीडिया प्रतिनिधियों से रू-ब-रू हो कर कोविड-19 के लिये प्रदेश स्तर पर चलाये जा रहे अभियान और राज्य शासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

श्री सुलेमान ने कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने का कारगर उपाय यही है कि सभी सावधानियाँ अपनाकर कोरोना की चेन को तोड़ा जाए। लॉकडाउन स्थायी उपाय नहीं है। इससे अर्थव्यवस्था रूकने और लोगों की आजीविका बंद होने से अनेक समस्यायें पैदा होती हैं। बेहतर है कि आम-जन कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों रखें और गाइड लाइन का सख्ती से पालन करें। बिना जरूरी काम भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर न जाएं, घर से निकलते वक्त मास्क अवश्य लगायें।

कोरोना नियंत्रण एवं उपचार की जानकारी देते हुए अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कई स्तरों पर सुधार किया गया है। इसमें टेस्टिंग केपेसिटी को 600 पर मिलियन से बढ़ाकर 9334 पर मिलीयन किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले में फीवर क्लीनिक, टेस्टिंग केपेसिटी बढ़ाना एवं क्वारेंटाइन सेंटर का संचालन प्राथमिकता से किया जा रहा है। साथ आई.आई.टी.टी. पर आधारित कार्यनीति में कोरोना संक्रमित व्यक्ति को आइडेंटीफाई, आईसोलेशन, टेस्ट और ट्रीट कर कोरोना नियंत्रण की दिशा में प्रभावी कार्य हो रहा है।

मो.सुलेमान ने बताया कि कोरोना संक्रमण में मध्यप्रदेश बेहतर स्थिति में है। प्रारंभ में प्रदेश देश में तीसरे-चौथे स्थान पर था। अब एक्टिव केसेस, रिकवरी रेट के मामले में प्रदेश 15 वें स्थान पर आ गया है। फेटेलिटी दर में सुधार हुआ है। यह 10.3 प्रतिशत से घटकर 2.7 प्रतिशत हुई है। देश के एक्टिव केसेस की संख्या में प्रदेश का हिस्सा केवल 1.6 प्रतिशत है।

एम्स के डायरेक्टर डॉ. सरमन सिंह ने बताया कि कोरोना ऐसे लोगों पर ज्यादा असर करता है, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो अथवा जिनकों ह्रदय या फेफडों से संबंधित बीमारी हो। साथ ही कोरोना वायरस बच्चों और बुजुर्गों को भी जल्दी संक्रमित करता है। डॉ. सिंह ने बताया कि अर्ली स्टेज में कोरोना संक्रमण का इलाज आसानी से हो जाता है, जबकि एडवांस स्टेज में मरीज को बचाना मुश्किल होता है। अत: जैसे ही सर्दी, खांसी-जुकाम के लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। अर्ली स्टेज में मरीज को होम क्वारेंटाईन करके ही इलाज किया जा सकता है। डॉ. सिंह ने जानकारी दी है कि भोपाल, उज्जैन और इंदौर में सीरो सर्विलान्स अर्थात रेपिड एंटीजेन टेस्ट प्रारंभ किये जा रहे हैं। जिससे कम समय में ज्यादा संख्या में टेस्ट किये जा सकेंगे। जिनका परिणाम भी जल्दी प्राप्त होगा।

स्वास्थ्य व्यवस्था हुई बेहतर

बताया गया कि प्रदेश में अस्पतालों की बेड केपेसिटी को बढ़ाया गया है। जनरल बेड की संख्या 2428 को बढ़ाकर 24 हजार 560 किया गया है। ऑक्सीजन युक्त जनरल बेड की संख्या 5 हजार 983 है जिसे 31 अगस्त तक 7 हजार 910 तक बढ़ा दी जाएगी। एच.डी.यू.बेड 1188 हैं जिन्हें इस माह के अंत तक 2204 तक बढ़ाया जायेगा। आई.सी.यू बेड की संख्या को 537 से बढ़ाकर 681 की गई है, जिसे इस माह के अंत तक 1606 किया जा रहा है। फिलहाल जनरल बेड और ऑक्सीजन युक्त जनरल बेड की कुल क्षमता का 22 प्रतिशत उपयोग हो रहा हैं। वहीं 29.9 प्रतिशत आई.सी.यू बेड का कोरोना के इलाज में इस्तेमाल हो रहा है।

इस अवसर पर आयुक्त, जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े एवं डायरेक्टर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन श्रीमती छवि भारद्वाज उपस्थित थीं।
 

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