पेट्रोल-डीजल के बाद सब्जियों के बढ़े दामों ने उड़ाए होश, 25 फीसदी से ज्यादा महंगी हुई

अजमेर. कोरोना काल (COVID-19) में पेट्रोल और डीजल (Petrol and diesel) के भावों के बाद अब सब्जियों के बढ़े दामों ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं. प्रदेश में सब्जियों (Vegetables) के भाव में एकाएक बढ़ोतरी ने लोगों के किचन का जायका बिगाड़ दिया है. इस सबके बीच घरेलू सिलेंडर के दामों में भी इजाफे ने कोढ़ में खाज का काम किया है. कोरोना महामारी से जूझते प्रदेश में सब्जियां भी इसके कहर से अछूती नहीं रह पा रही हैं. सब्जियों के दामों में 25 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है.

ग्राहक और दुकानदार दोनों परेशान

सब्जियों के भाव भी कोरोना के चलते उछाल पर हैं. बेशक लॉकडाउन में मिली रियायत के बाद सब्जी मंडियों में चहलपहल बढ़ गई है, लेकिन सब्जियों के भाव ग्राहकों को आहें भरने पर मजबूर कर रहे हैं. अजमेर शहर में सब्जियों के भाव जहां एक तरफ ग्राहकों को परेशान कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ दुकानदार भी अपनी लागत डूबने के डर से परेशान नजर आ रहे हैं. शहर की सब्जी मंडियों में आलू कुछ दिन पहले तक 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा था लेकिन आज वह 25 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 25 रुपये किलो मिल रहा है. हालांकि प्याज़ के दाम कुछ दिन से 20 रुपए प्रति किलो बने हुए हैं लेकिन टमाटर, धनिया और अदरक के दाम ग्राहकों को दिन में तारे दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

टमाटर के भाव लगभग दुगुने हुए

कुछ दिन पहले तक टमाटर के भाव 40 रुपये और धनिये के भाव 80 रुपये प्रति किलो थे, लेकिन आज टमाटर लगभग दुगुने 70 रुपये किलो और धनिया 100 से 125 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. अदरक की कीमत 100 रुपये के आसपास मंडरा रही है. मिर्ची भी लोगों की आंखों में अपने बढ़े हुए भावों से आंसू लाने को तैयार है. शहर में कुछ दिन पहले 20 से 25 रुपए किलो बिकने वाली मिर्ची आज 30 से 35 रुपए किलो तक बिक रही है. अन्य सब्जियों में लौकी, टिंडे, कद्दू, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियां 20 से 30 रुपए किलो के भाव से बाजार में बिक रही है.

गर्मी में नींबू और कैरी भी नहीं दे रही है राहत

गर्मी से राहत देने वाले नींबू और कैरी जहां कुछ दिन पहले 30 रुपये किलो तक बिक रहे थे वहीं आज इनके भी दाम 40 रुपये तक पहुंच गए हैं. मानसून भी अपनी दस्तक देने लगा है. इसके आने पर अक्सर सब्जियां सस्ती हो जाती हैं. लेकिन इस बार कोरोना का कहर मानसून पर भी भारी पड़ता नजर आ रहा है. इस कहर का असर आम जनता की जेब पर साफ नजर आ रहा है.
 

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