मध्यप्रदेश में हुई सड़क दुर्घटना में झारखंड के दो तीरंदाजों की मौत

मध्य प्रदेश के शहडोल में बुधवार तड़के एनएच-43 पर हुई सड़क दुर्घटना में जमशेदपुर (झारखंड) के दो तीरंदाजों की मौत हो गई। इनके नाम जसपाल सिंह और सारस सोरेन हैं। दोनों कार से भोपाल जा रहे थे। इस दौरान शहडोल में खड़े ट्रक से उनकी कार टकरा गई। 

इनकी मौत की खबर पहुंचते ही खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। जसपाल के परिजनों को तो पता चल चुका है कि अब उनका लाड़ला इस दुनिया में नहीं है, लेकिन सारस सोरेन के माता-पिता को केवल दुर्घटना जानकारी दी गई है, सारस के मरने की बात नहीं बताई गई है। 

वर्ल्ड इंडोर आर्चरी के स्वर्ण पदक विजेता 24 वर्षीय जसपाल सिंह साकची स्थित सागर होटल के पीछे बगान एरिया के रहनेवाले थे, जबकि दस दिनों पहले एनआईएस कोच की परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले 28 वर्षीय सारस सोरेन मानगो स्थित स्वर्णरेखा परियोजना की कॉलोनी में अपने माता-पिता व बड़े भाई के साथ रहते थे। 

भोपाल जा रहे थे दोनों 
जसपाल और सारस मध्य प्रदेश के भोपाल जा रहे थे, जहां गुरुवार से जूनियर नेशनल आर्चरी चैंपियनशिप का आयोजन होना है। दरअसल, ये दोनों वहां स्टॉल लगाने जा रहे थे। जसपाल और सारस ने पार्टनरशिप में तीरंदाजी से जुड़े सामान की बिक्री शुरू की थी। 

तड़के 4.30 बजे हुई दुर्घटना
आई-20 कार पर सवार जसपाल और सारस बुधवार को सुबह लगभग 4.30 बजे सड़क दुर्घटना का शिकार हुए। कार खुद जसपाल चल रहे थे, जबकि सारस आगे की सीट पर बैठे थे। कार के पिछले हिस्से में लगभग 15 लाख का सामान था। 4.30 बजे जसपाल ने कार से अपना नियंत्रण खोया और शहडोल के पास एनएच-43 पर खड़े एक ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी। घटना में कार के परखच्चे उड़ गए तथा जसपाल और सारस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। 

कोच हरेंद्र व जसपाल के पिता हुए रवाना
दुर्घटना की खबर मिलते ही जसपाल के पिता अवतार सिंह तारे, तीरंदाजी कोच हरेंद्र सिंह व जसपाल के तीन अन्य शुभचिंतक बुधवार सुबह नौ बजे जमशेदपुर से सड़क मार्ग द्वारा शहडोल के लिए रवाना हो गए हैं।  

इकलौता बेटा था जसपाल

तीरंदाज जसपाल सिंह साकची निवासी अवतार सिंह का इकलौता बेटा था। अब एक छोटी बहन (जसबीर कौर) रह गई है, जो थाईलैंड में फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही है। जसपाल के निधन से परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। जसपाल के पिता की हावड़ा ब्रिज के समीप अपनी लेथ मशीन है। 

घर में छोटा था सारस सोरेन
मानगो प्रोजेक्ट कॉलोनी निवासी सारस सोरेन तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। सारस के बहन की शादी हो चुकी है तथा बड़े भाई वीर सिंह सोरेन भी शादीशुदा हैं। सारस के पिता गुरुदास मांझी स्वर्णरेखा परियोजना में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी हैं, जो एक महीने बाद सेवानिवृत्त होनेवाले हैं। सारस की माता बिमला मांझी गृहिणी हैं, वह चार दिनों पहले ही अस्पताल से घर लौटी हैं। उनको दिल का दौरा पड़ा था।

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