रबड़ नीति मसौदा: शोध, निर्यात बढ़ाने, आयात में कमी लाने के लिए बजटीय समर्थन पर जोर

नई दिल्ली । मोदी सरकार ने देश के रबड़ क्षेत्र में शोध बढ़ाने, निर्यात को बढ़ावा देने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए क्षेत्र को बजटीय समर्थन उपलब्ध कराएगी। राष्ट्रीय रबड़ नीति के मसौदे में यह कहा गया है। प्रस्तावित रबड़ नीति में कौशल विकास, छोटे किसानों, कर्मचारियों तथा उद्यमियों को प्रोत्साहन तथा गुणवत्ता एवं मानकों पर नियमन लागू करने पर भी जोर दिया गया है। मसौदे के अनुसार इन सभी उपायों के लिए बजट में प्रावधान किया जाएगा। नीति के मसौदे के तहत सभी तरह के उपयोग और कानूनी उद्देश्य से प्राकृतिक रबड़ को कृषि उत्पाद के रूप में माने जाने की संभावनायें तलाशने का काम करेगी। इसमें कृषि एवं किसान मंत्रालय के साथ विचार विमर्श के साथ रबड़ उत्पादन से होने वाली आय को कृषि आय माने जाने की संभावना पर भी गौर किया जाएगा। मसौदा नीति के अनुसार केंद्र सरकार के बजटीय समर्थन से रबड़ की खेती पर जोर दिया जाएगा। नीति मसौदे के अनुसार, रबड़ की खेती के लिए पर्याप्त सब्सिडी दी जाएगी। इसमें छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी…।’’ वाणिज्य मंत्रालय ने मसौदा नीति पर लोगों की राय मांगी है। नीति का मकसद अन्य बातों के अलावा रबड़ उद्योग को आर्थिक, समाजिक और पर्यावरण आयाम के संदर्भ में भरोसेमंद बनाना है। साथ ही उत्पादन से लेकर विपणन तक पूरी मूल्य श्रृंखला का विकास करना है। भारत फिलहाल दुनिया में प्राकृतिक रबड़ का छठा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसकी उत्पादकता 2017-18 में 6,94,000 टन रही। केरल और तमिलनाडु की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत है। रबड़ उत्पादन करने वाले अन्य राज्यों में त्रिपुरा, असम, मेघालय, ओड़िशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *