वेतन गड़बड़ी में सेवानिवृत्ति के बाद नहीं होगी वसूली

भोपाल । प्रदेश सरकार के ‎किसी भी ‎विभाग से गलती से वेतन निर्धारण में गड़बड़ी हुई और किसी कर्मचारी को अधिक राशि मिल गई तो सेवानिवृत्त होने के बाद उससे उक्त राशि नहीं वसूली जाएगी। बल्कि सरकार को ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी से वसूली गई वह राशि लौटानी पड़ सकती है। इस तरह का एक फैसला हाईकोर्ट ने हाल में दिया है। अक्सर विभागों द्वारा कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन निर्धारण में गड़बड़ी हो जाती है। बाद में वह पकड़ में आती है, तब संबंधित अधिकारी, कर्मचारी से वसूली की जाती है। इस तरह के प्रकरणों में हाईकोर्ट ने विभाग की गलती मानी है। ऐसा ही मामला सतना जिले के पुलिस अधीक्षक कार्यालय का है, जिसमें पुलिस निरीक्षक रविनाथ पांडेय से 1 लाख 32 हजार 206 रुपये वसूलने के आदेश दिए गए। इस पर विभाग ने 12 फीसद का ब्याज भी लगाया। उक्त निरीक्षक ने सेवानिवृत्त होने के बाद मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया कि इसमें उक्त पुलिस निरीक्षक की गलती नहीं है, बल्कि विभाग ने वेतन निर्धारण में गड़बड़ी की है इसलिए वसूली बंद की जाए और जो राशि पुलिस निरीक्षक से वसूली गई है, उसे तीन माह के भीतर 6 फीसद ब्याज सहित वापस किया जाए। इस तरह के मामले में पीडित रविनाथ पांडेय अकेले नहीं हैं, जिनसे सेवानिवृत्त होने के बाद वसूली की जा रही थी। प्रदेश शासन के विभागों में ऐसे सैकड़ों अधिकारी, कर्मचारी हैं, जिनके वेतन निर्धारण में विभाग की तरफ से गलतियां हुईं, जो बाद में पकड़ में आई थी। इसके बाद संबंधितों से वसूली के आदेश जारी हुए। कुछ मामले तो ऐसे भी हैं कि संबंधित कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उनके बच्चों को वसूली के नोटिस भेजे गए। इतनी बड़ी विसंगति पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर प्रभावित अधिकारी, कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। मप्र कर्मचारी आयोग के पूर्व सदस्य वीरेंद्र खोंगल का कहना है कि हाईकोर्ट के इस निर्णय से प्रभावितों से की जा रही वसूली को संबंधित विभागों द्वारा सख्ती से रोकना चाहिए। इतना ही नहीं, खोंगल का कहना है ‎कि कर्मचारी से अब तक विभाग द्वारा वसूले गए रुपए भी वापस ‎किए जाने चाहिए।

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