15 महीने से नहीं मिला वेतन, बंद होने की कगार पर आश्रम स्कूल

15 महीने से नहीं मिला वेतन, बंद होने की कगार पर आश्रम स्कूल
प्रदेश में आदिम जाति कल्याण विभाग के अधीन संचालित अनुदान प्राप्त अशासकीय आश्रम छात्रावास और विद्यालयों में काम करने वाले शिक्षक एवं कर्मचारियों को पिछले करीब डेढ़ साल से वेतन नहीं मिला है। जब हिम्मत टूट गई, तो लगभग 30 जिलों के यह सेवक मजबूरन भोपाल आ गये। यहां बैठक करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को समस्या बताई गई, लेकिन आरोप है कि सिर्फ आश्वासन मिला है। इस मामले में संज्ञान लेकर आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन ने प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, आदिम जाति कल्याण विभाग तथा संचालक, आदिम जाति कल्याण विभाग, भोपाल से तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के छिंदवाड़ा, डिंडोरी, भिण्ड, मुरैना, रायसेन, आलीराजपुर, झाबुआ, इन्दौर सहित अनेक जिलों के शिक्षक और कर्मचारी मजबूरन भोपाल आये। सबसे पहले इन्होंने अशासकीय अनुदान प्राप्त आदिम जाति, अनुसूचित जनजाति शिक्षक एवं कर्मचारी संघ के बैनर तले एक बैठक की। संगठन के अध्यक्ष देवसिंह के समक्ष प्रदेशभर से आये इन कर्मचारियों ने वेतन सहित अन्य समस्याओं को खुलकर रखा। उसके बाद खुलकर अपनी समस्याओं का दर्द बताया। मण्डला से आये महादेव पाटीदार और आर.के. तिवारी ने बताया कि पिछले 15 माह से वेतन न मिलने के कारण बच्चों के पालन-पोषण और अध्यापन पर संकट खड़ा हो गया है। विद्यालयों में फीस के लिये स्कूल परेशान कर रहे हैं। नाम काटने की चेतावनी भी दे दी गई है। छिंदवाड़ा के अशोक दुबे ने बताया कि उनके साथियों ने ऐसा बुरा दौर कभी नहीं देखा है। विभाग से लगातार पत्र व्यवहार करने के बाद भी हमें सताया जा रहा है।
