अनाज के बदले नगद योजना फेल, झारखंड के बाद पुडुचेरी में भी दुरुपयोग

नई दिल्ली |  अनाज के बदले नगद की पायलट योजना बेअसर साबित हो रही है। इसके चलते केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से हाथ खींचने की तैयारी कर रही है। सरकार झारखंड के नगड़ी ब्लॉक के बाद इस साल के अंत तक पुडुचेरी में भी ‘पहल’ योजना को बंद करने का फैसला कर सकती है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में सफल नहीं 

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का मानना है कि खाद्यान्न के बदले कैश योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सफल नहीं है। मंत्रालय ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नगड़ी ब्लॉक (झारखंड), पुडुचेरी और चंडीगढ़ में डीबीटी के दो मॉडल शुरू किए थे। लेकिन दोनों मॉडल के पायलट प्रोजेक्ट बहुत सफल नहीं रहे हैं। खाद्यान्न के बदले कैश देने को लेकर काफी शिकायते मिल रही हैं। 

शिकायतें भी मिलीं 

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में डीबीटी के गलत परिणाम सामने आए हैं। यही वजह है कि झारखंड के बाद पुडुचेरी भी डीबीटी को बंद करने के लिए कह रहा है। चंडीगढ़ में लाभार्थियों की संख्या बहुत कम है। इसके साथ वह शहरी क्षेत्र है। ऐसे में चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट का कोई खास फीडबैक नहीं है। पर झारखंड और पुडुचेरी में योजना को लेकर खाद्य एवं वितरण मंत्रालय को काफी शिकायतें मिली हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, दोनों राज्यों में अगर यह पायलट परियोजनाएं सफल होती तो केंद्र सरकार पूरे देश में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना लागू करती।

पैसों से पी रहे शराब

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को शिकायत मिली थी कि पुडुचेरी में खाद्यान्न सब्सिडी के पैसों से लोग शराब पी रहे हैं। सरकार महिला के खाते में पैसा भेजती है, पर महिलाओं के खाते से पैसा निकलवाने के बाद पुरुष उसे छीनकर शराब पी जाते हैं। इसके अलावा जो परिवार खाद्यान्न खरीदते हैं, वह जरुरत से बहुत कम होता है। इसलिए, फिर से पीडीएस की वहीं व्यवस्था शुरू होनी चाहिए। 

मेनका ने डीबीटी पर सवाल उठाए थे

इससे पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने भी डीबीटी का विरोध किया है। उन्होंने समेकित बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) के लाभार्थियों को घर ले जाने वाले राशन के बदले आधार से जुड़े बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तातंरण (डीबीटी) के जरिए राशि देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।  

60% को जानकारी ही नहीं

पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों का आंकलन करने के लिए खाद्य एवं वितरण मंत्रालय ने स्वतंत्र एजेंसी के जरिए सर्वे भी कराया। इन सर्वे के नतीजों से साफ है कि योजना विफल रही है। झारखंड में किए गए सर्वे रिपोर्ट में बताया गया था कि 60 फीसदी लाभार्थियों को इस तरह की योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

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