अहमदाबादः ‘मरे हुए’ व्यक्ति ने कराया जीवन बीमा !

क्या एक मृत व्यक्ति बीमा कंपनी में जाकर जीवन बीमा पॉलिसी ले सकता है? क्या कोई विधवा अपने मृत पति को जिंदा दिखाकर उसकी बीमा पॉलिसी ले सकती है। ऐसा ही उलझा हुआ एक मामला उपभोक्ता फोरम के सामने गया जिसे फोरम ने निरस्त करते हुए मामला सिविल कोर्ट में दायर करने का कहा है। 

मामला अहमदाबाद के मुन्ना गोपीचंद गायकवाड से जुड़ा है। उन्होंने 5 सितंबर 2011 को अवीवा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी इंडिया लिमिटेडसे पॉलिसी ली। दो साल बाद उनकी पत्नी अनीता गायकवाड ने बीमा कंपनी में क्लेम का लिए दावा किया। इस दावे के अनुसार उनके पति की मृत्यु 12 जुलाई 2013 को हुई। बीमा कंपनी ने क्लेम देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि गायकवाड की मौत पॉलिसी जारी होने से पहले हो चुकी थी। 

बीमा कंपनी ने कहा कि जांच में उन्हें पता चला कि गोपीचंद की मौत 14 अप्रैल 2011 को एक प्राइवेट अस्पताल में हो गई थी और उन्हें पॉलिसी सितंबर 2011 में जारी की गई। बीमा कंपनी के क्लेम देने से इनकार करने के बाद अनीता ने उपभोक्ता फोरम में ममला दायर किया। अनीता ने उपभोक्ता फोरम में कहा कि अगर उनके पति की मृत्यु बीमा कराने से पहले हो गई थी तो फिर उनके बीमा फॉर्म पर हस्ताक्षर कहां से आए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीमा कंपनी ने बीमा करने से पहले सत्यापन नहीं किया था? 

कंपनी ने फोरम में कहा कि गायकवाड को चंदन गोपीचंद गायकवाड के नाम से जाना जाता था। स्थानीय पुलिस ने उनका आपराधिक रेकॉर्ड दिए। वह शराबी था और पुलिस के अनुसार उनकी मृत्यु अप्रैल 2011 में हार्ट अटैक से हो गई थी। अनीता के वोटर कार्ड में भी उनके पति का नाम चंदन है। कोर्ट में कहा गया कि चंदन और मुन्ना एक ही व्यक्ति हैं। 

केस की सुनवाई के दौरान फोरम ने कहा कि इस मामले में हो सकता है कि अनीता ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने पति के मरने के बाद बीमा कराया। इस मामले में ट्रायल की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने मामला सिविल कोर्ट में दायर करने का कहा है।

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