आपातकाल के दौरान समय पर चलने लगी थीं ट्रेनें, रुक गई थी कालाबाजारी!

नई दिल्ली,  देश से इमरजेंसी हटाए जाने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिया गांधी ने एक अमेरिकी लेखक को इंटरव्यू देते हुए कहा कि इमरजेंसी के दौरान देश में विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा इजाफा हुआ, सरकारी कंपनियों की भूमिका खत्म होने की शुरुआत हुई, औद्योगिक उत्पादन में बड़ा इजाफा दर्ज हुआ, महंगाई पर लगाम लगी और देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगी. इन दलीलों पर इंदिया गांधी ने कहा कि लोग उनसे पूछते हैं कि आखिर देश में इमरजेंसी लगाने का फैसला पहले क्यों नहीं लिया? इंदिरा गांधी की इस दलील पर गौर करें तो देश में 21 महीनों की इस इमरजेंसी के दौरान आम आदमी को बड़ी राहत पहुंची और इस गैरलोकतांत्रिक व्यवस्था ने उसे लोकतंत्र के एक अच्छे स्वरूप के लिए तैयार कर दिया.


12 जून, 1975 को जब एक कोर्ट ने इंदिरा गांधी के लोकसभा चुनाव में धांधली के सहारे जीत हासिल करने का दोषी पाया और उनपर 6 साल तक चुनाव लड़ने का प्रतिबंध लगाया तब कांग्रेस में नेतृत्व चुनने के लिए उन्हें तीन हफ्ते का समय मिल गया. लेकिन कोर्ट से मिले इस समय में नेतृत्व तलाशने की जगह इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देशभर में इमरजेंसी का ऐलान करते हुए सभी संवैधानिक अधिकारों को निरस्त कर दिया. दरअसल कोर्ट के 12 जून के फैसले के बाद विपक्ष ने 29 जून से बड़े स्तर पर देशव्यापी धरना और प्रदर्शन का ऐलान कर दिया.

इमरजेंसी से पहले सरकारी फैक्ट्रियां बंद की भेंट चढ़ी हुई थीं. ज्यादा फैक्ट्रियां बंद के चलते उत्पादन रोक चुकी थी. देशभर में फैक्ट्रियों के मजबूद और मैनेजप आमने-सामने थे और मजदूरों की सैलरी बढ़ाने की मांग पर जमकर राजनीति हो रही थी. लेकिन इमरजेंसी लागू होने के तुरंत बाद इस क्षेत्र से भी प्रदर्शन पूरी तरह गायब हो गया और ज्यादातर फैक्ट्रियों में न सिर्फ उत्पादन कार्य फिर से शुरू हो गया बल्कि कई फैक्ट्रियों में उत्पादन के नए रिकॉर्ड सामने आने लगे.


इसी तर्ज पर देश में इमरजेंसी के दौरान कालाबाजारी पर बड़ा वार किया गया. ब्लैकमार्केटिंग, होर्डिंग, गैरकानूनी कारोबार और दलालों की गतिविधियों पर ताला लग गया. इन कामों में लिप्त पाए जाने वाले लोगों को बड़े स्तर पर जेल में भर दिया गया. इसका सीधा असर आम आदमी को दिखाई दिया जो लंबे समय से कालाबाजारी और महंगाई से परेशान था. इन फायदों के बीच आम आदमी पर भी बड़ा असर पड़ा. दंगा, विरोध, प्रदर्शन और राजनीति से मुक्त होकर उसे कानून के उचित परिधि में रहने का मौका मिला. सरकारी व्यवस्था पर महज सवाल खड़ा करने की जगह उसे सरकारी नियमों के दायरे में रहना ज्यादा फायदेमंद लगा. लिहाजा इन्हीं बदलावों को केन्द्र में रखते हुए इमरजेंसी की सजा पाकर विपक्ष में बैठी इंदिरा गांधी ने अमेरिकी लेखक से दावा किया कि था कि इमरजेंसी से देश में नेता और भ्रष्टाचार में लिप्त लोग परेशान हुए लेकिन आम आदमी को इसने लोकतांत्रिक सलीका सिखा दिया.


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