आम आदमी पार्टी नेताओं के खिलाफ 140 मुकदमे, सिर्फ एक मामले में दोष सिद्ध

भारत में न्याय व्यवस्था की रफ्तार धीमी होने की सबसे बड़ी वजह हर छोटे-बड़े मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाना है. इसके अलावा राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए कोर्ट का समय बर्बाद करने की पुष्टि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी के मंत्री, सांसद, विधायक अौर नेताअों के खिलाफ दर्ज कराए गए मामलों से की जा सकती है.?
आप नेताओं के खिलाफ किए गए सिर्फ एक मामले में दोष सिद्ध् हुआ है. जबकि 72 मामलों में समझौता हुआ या कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया. 39 मामले अभी कोर्ट में चल रहे हैं. वहीं अन्य बचे मामलों में या तो अदालत ने रोक लगा दी है या अभी तक चार्जशीट फाइल नहीं की गई है.
क्या ऐसे अांकड़ों का यह मतलब है कि ऐसे कानूनी मुकदमों से आप नेताओं के उत्पीडन की कोशिश कर उन्हें रोका जा रहा है?
मुख्यमंत्री केजरीवाल, सिसोदिया सहित आप मंत्री सत्येंद्र जैन, गोपाल राय, कैलाश गहलोत और आप विधायकों के खिलाफ दर्ज कराए गए मामलों की पूरी जानकारी नीचे दी जा रही है.
सीएम अरविंद केजरीवाल
केजरीवाल के खिलाफ क्रिमिनल (फौजदारी) अौर सिविल (दीवानी) के करीब 30 मामले दिल्ली सहित मुंबई, बंगलुरू, गुवाहाटी अौर उत्तर प्रदेश में दर्ज कराए गए हैं. जिनमें से 12 मामले आपराधिक मानहानि के हैं. इनमें से 4 मामलों में केजरीवाल को दोषमुक्त कर दिया गया है. अन्य चार मामलों में केजरीवाल के माफी मांगने के बाद समझौता हो गया. बाकी बचे चार मुकदमे लंबित पड़े हैं.
दिल्ली पुलिस की अोर से केजरीवाल के खिलाफ 8 मुकदमे दर्ज कराए गए. जिनमें केजरीवाल पर दंगे, प्रशासनिक कर्मचारियों पर अापराधिक हमला करने, आपराधिक धमकी देने, बिना अनुमति के रैली करने अौर भड़काऊ भाषण देने के आरोप शामिल हैं. हालांकि इनमें से 6 मामलों में कोर्ट ने केजरीवाल को दोषमुक्त करार दिया है.
उत्तर प्रदेश में चुनाव संहिता का उल्लंघन करते हुए भाषण देने अौर बिना अनुमति रैली करने को लेकर केजरीवाल के खिलाफ 3 मामले दर्ज कराए. तीनों मामलों पर अभी कोर्ट ने स्टे लगा दी है. इनके अलावा चार एफआईआर भी कराई गई हैं. जिनमें तीन एफआईआर सिर्फ 2014 में राज भवन के सामने धरना देने को लेकर हैं जबकि एक शिकायत दिल्ली मुख्य सचिव पर हमले के आरोप को लेकर है. ये सभी मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं.
केजरीवाल के खिलाफ 2013 में चुनावों के दौरान चुनावी खर्च को लेकर एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है. इसके अलावा विरोध से संबंधित मामलों के लिए दायर दो आराेप भी लंबित हैं.
उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
सिसोदिया के खिलाफ कुल 12 मामले दर्ज कराए गए हैं. जिनमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के अाराेपों वाले दो मामलों में सिसोदिया बरी हो गए. इसके अलावा दंगा भड़काने के आरोपों वाले 6 में से 4 मामलों में भी दोषमुक्त कर दिया गया है. आपराधिक मानहानि के दो मुकदमों में से एक में समझौता हो गया है. जबकि एक अभी लंबित है. इन मामलों में केजरीवाल-सिसोदिया सह-आरोपी हैं.
सिसोदिया पर एक मामला दिल्ली मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर हमले के आरोपों का है. जबकि दूसरा केजरीवाल के साथ राज भवन के सामने विरोध प्रदर्शन करने को लेकर दर्ज कराया गया है.
आप मंत्री
दिल्ली के कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन, गोपाल राय और अशोक गहलोत के खिलाफ कुल चार मामले दर्ज कराए गए हैं. इन सभी पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और दंगा करने के आरोप लगाए गए हैं. तीनों मंत्रियों को सभी मामलों में बरी कर दिया गया है.
हालांकि सत्येंद्र जैन के खिलाफ सीबीआई ने मनी लॉन्ड्रिंग का एक मामला दर्ज किया है जो अभी लंबित है. पिछले साल अक्तूबर में आयकर विभाग ने गहलोत के घर पर छापा भी मारा था लेकिन अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया.
आप सांसद
आप राज्यसभा सांसद संजय सिंह के खिलाफ भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के नजरिए के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है. जिसमें सिंह पर आरोप लगाया गया कि एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की मंशा से उन्होंने हमला किया. हालांकि जांच के दौरान सामने अाया कि हमला करने वाले शख्स संजय सिंह नहीं थे. ऐसे में उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनाया जा सकता था. इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि सिंह खुद एक पीड़ित थे. सिंह को शिकायतकर्ता ने बिनी किसी दोष के थप्पड़ मारा और उस पर उन्होंने कोई जवाबी प्रतिक्रिया भी नहीं दी. लिहाजा सिंह को मुक्त कर दिया गया.
आप विधायक
उत्तम नगर से अाप विधायक नरेश बाल्यान के खिलाफ अवैध शराब का जखीरा इकठ्ठा करने से लेकर नैतिक आचार संहित का उल्लंघन करने, लोकसेवक को धमकी देने और हमला करने को लेकर तीन मामले दायर किए गए. लेकिन तीनों में ही बाल्यान को बरी कर दिया गया.
कोंडली से विधायक मनोज कुमार के खिलाफ उगाही और आपराधिक मानहानि के कुल 6 मुकदमे दायर किए गए. इनमें से तीन में मनोज को बरी कर दिया गया है जबकि तीन मामले अभी लंबित हैं.
ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान पर कुल 12 मामले दर्ज हुए. इनमें से सात में उनके खिलाफ चार्जशीट भी फाइल की गई. हालांकि तीन में खान को राहत मिली. जबकि चार लंबित हैं.
राजेंद्र नगर से विधायक विजेंद्र गर्ग पर बिना अनुमति रैली करने, नैतिक आचार संहिता का उल्लंघन करने अौर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को को लेकर तीन मुकदमे दर्ज हुए. इन्हें सभी तीनाें मामलों में दोषमुक्त कर दिया गया.
करोल बाग से विधायक विशेष रवि पर शिकायतकर्ताओं को आम अादमी पार्टी के लिए चंदा देने के लिए दवाब डालने का अारोप लगाते हुए मामला दर्ज हुआ. जिसमें कोर्ट ने पाया कि रवि को मां झंडेलवाली को-ऑपरेटिव अर्बन थ्रिफ्ट के खिलाफ को ऑपरेटिव सोसाइटीज के रजिस्ट्रार को दी गई शिकायत के जवाब के रूप में फंसाया गया था. लिहाजा कोर्ट ने रवि को बरी कर दिया.
चांदनी चौक से अाप विधायक अलका लांबा के खिलाफ एक निजी स्टोर में दवाब पूर्वक घुसने अौर बिल काउंटर पर नुकसान पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज कराया गया. इस मामले को कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह समाज के खिलाफ नहीं है. एक जनप्रतिनिधि होने के नाते अलका लांबा उस स्टोर में भले मकसद से घुसी थीं. और यह कोई बड़ा अपराध नहीं है.
मोती नगर से विधायक शिवचरन गोयल के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर चिपकाने का अारोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया गया. कोर्ट ने बिना पर्याप्त जांच के दायर की गई चार्जशीट बताते हुए मामला खारिज कर दिया. इनके अलावा अन्य भी कई विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए और उन्हें बरी कर दिया गया.
इस मामले में आम आदमी पार्टी लीगल सेल के सचिव रिषीकेश कुमार ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए इन्हें राजनीतिक मंशा से उठाए गए कदम बताया. उन्होंने कहा, ' आप नेताओं के खिलाफ दर्ज कराए गए ये मुकदमे इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे मोदी-शाह की सरकार अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम को डराने के लिए दुर्भावनापूर्ण तैयार की गई रणनीति के तहत पुलिस का इस्तेमाल कर रही है.'
