इधर भाजपा की घेरेबंदी में जुटे हुड्डा, उधर अपने दिखा रहे बगावती तेवर, निर्मल का बड़ा एलान

हरियाणा कांग्रेस के टिकट वितरण के बाद कांग्रेस सरकार बनाने का दावा कर रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भाजपा की घेराबंदी में जुट गए हैं। लोकसभा में शिकस्त का मुंह देखने के बाद हुड्डा अब विधानसभा चुनाव में रिस्क नहीं लेना चाहते, लिहाजा आलाकमान के सामने हरियाणा की जीत का दावा पेश कर चुके हैं। शर्त यह रखी थी कि टिकट वितरण उनके मन के मुताबिक होना चाहिए।
ऐसे में अधिकतर सीटों पर हुड्डा के मुताबिक टिकट दिए गए हैं। जबकि, अंबाला संसदीय क्षेत्र में कुमारी सैलजा ने अपनी चलाई है। यहां आलाकमान के सामने हुड्डा का दबाव काम नहीं आया। इसी के चलते अंतिम समय तक प्रयास के बावजूद वह अंबाला शहर से निर्मल सिंह और उनकी बेटी चित्रा को टिकट दिलवाने में नाकाम रहे। जिसके बाद से निर्मल सिंह ने बागी तेवर अख्तियार कर लिए हैं।
उधर, कैप्टन अजय सिंह यादव के स्थान पर पार्टी ने इस बार उनके पुत्र को टिकट दिया है। जबकि हुड्डा खेमे के सभी पूर्व विधायकों को भी पार्टी ने टिकट से नवाजा है। कुल मिलाकर टिकट वितरण में हुड्डा और सैलजा ने अपनी चलाई है। इसके अलावा किरण चौधरी और डॉ. अशोक तंवर के कहने पर भी कुछ एक टिकटों पर विचार किया गया है। बावजूद इसके तंवर कड़े तेवर अख्तियार किए हुए हैं।
चिरंजीव राव के लिए डटेंगे कैप्टन अजय सिंह यादव
पांच बार के पूर्व विधायक कैप्टन अजय सिंह यादव की मांग इस बार उनके पुत्र के लिए टिकट की थी। पार्टी ने उनके पुत्र चिरंजीव राव को टिकट दे कर मैदान में उतारा है। अब कैप्टन अपने बेटे के लिए वोट मांगेंगे। वैसे भी कैप्टन अजय सिंह यादव की पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ पटरी नहीं बैठती है। कैप्टन समय-समय पर अपना विरोध भी जताते रहते हैं। अब पुत्र को टिकट मिलने के बाद वे उसके लिए मैदान में डटेंगे। चिरंजीव राव बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के दामाद हैं। युवा कांग्रेस में लंबे समय तक काम किया है। कैप्टन उनके लिए लोकसभा चुनाव में भी टिकट की मांग कर रहे थे।
हुडडा के कहने पर सबसे ज्यादा टिकट
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कहने पर आलाकमान ने सबसे अधिक टिकटों का बंटवारा किया है। हुड्डा खुद तो किलोई से लड़ेंगे ही साथ ही अपने खेमे के सभी वर्तमान विधायकों को टिकट दिलवाने में वे कामयाब हुए हैं। इसके अलावा पार्टी ने हुड्डा के कहने पर पचास से अधिक टिकट दिए हैं। इसके साथ ही उनके कंधों पर पार्टी को जीत दिलवाने की जिम्मेदारी भी आ गई है। हुड्डा ने नए-पुराने, दमदार और जिताऊ चेहरों पर ही दांव लगाया है। उन्होंने हर बिरादरी से जीत का दम रखने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट दिलाई है।
सैलजा ने अंबाला में पूरी चलाई
कुमारी सैलजा ने अपने संसदीय क्षेत्र में ऐसी चलाई कि हुड्डा के करीबी निर्मल सिंह को ही किनारे लगा दिया। यहां पर अधिकतर टिकटें सैलजा के खाते से ही कांग्रेसियों को मिली हैं, लेकिन यह कोई गारंटी नहीं है कि जो टिकटें सैलजा के कहने पर दी गई हैं, उन पर हुड्डा समर्पित कार्यकर्ता कितना जोर लगाएंगे। टिकट वितरण में पहले दिन से पेंच ही अंबाला लोकसभा को लेकर फंसा था, जिसके चलते टिकट देर से फाइनल हुईं। अंबाला सैलजा का लोकसभा क्षेत्र है, वह इसके अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर अपनी पसंद के ही उम्मीदवार उतारने पर अंत तक अड़ी रहीं। जिससे पूर्व मंत्री निर्मल सिंह और उनकी बेटी चित्रा सरवारा को टिकट नहीं मिल पाया।
कालका, पंचकूला और मुलाना में मुश्किल से चली
कालका सीट पर कांग्रेस ने प्रदीप चौधरी, मुलाना पर फूलचंद मुलाना के बेटे वरुण और पंचकूला से चंद्रमोहन को उतारा है। इन तीनों सीटों पर भी सैलजा अपने दावेदार पेश कर रही थीं, लेकिन हुड्डा के अड़ जाने के बाद यह नाम फाइनल हुए। जिसमें चंद्रमोहन के नाम पर हुड्डा और सैलजा दोनों की रजामंदी रही। प्रदीप हाल ही में इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। वह दो बार कालका के विधायक रह चुके हैं।
कांग्रेस में विद्रोह, निर्मल और चित्रा आजाद लड़ेंगे
टिकट वितरण के बाद कांग्रेस में विद्रोह हो गया है। निर्मल अंबाला शहर और चित्रा अंबाला कैंट से आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ेंगे। निर्मल के साथ अंबाला से टिकट के दावेदार हिम्मत सिंह ने भी कांग्रेस के खिलाफ आवाज उठा दी है। ऐसे में निर्मल और चित्रा जीतें या हारें, इनके लड़ने से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ सकता है। निर्मल का कैंट के साथ ही शहर में अच्छा खासा वोट बैंक है।
संपत, नरेश यादव भी टिकट आवंटन से नाराज
पूर्व मंत्री संपत सिंह और अटेली से कांग्रेस के पूर्व विधायक नरेश यादव टिकट आवंटन को लेकर नाराज हैं। संपत सिंह ने आगामी निर्णय लेने के लिए अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है। इसमें वह आगामी रणनीति तय करेंगे। नरेश यादव भी बागी तेवर अपना सकते हैं। हिसार जिले में संपत के साथ ही कांग्रेस ने इस बार पूर्व सांसद नवीन जिंदल के परिवार से भी किसी को टिकट नहीं दिया है।
