इसलिए ‘वंदे मातरम्’ को नहीं मिला राष्ट्रगान का दर्जा,जानिए ‘राष्ट्रीय गीत’ और ‘राष्ट्रगान’ में अंतर

नई दिल्ली, 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रीय गीत' किसी भी देश की वो धरोहर होती हैं, जिससे उस राष्ट्र की पहचान जुड़ी हुई होती है। प्रत्येक राष्ट्र के 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रीय गीत' की भावनाएं भले ही अलग हों, लेकिन अंतत: इससे राष्ट्रभक्ति की भावना की ही अभिव्यक्ति होती है। स्वतंत्रता दिवस की 72वीं वर्षगांठ के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रीय गीत' के बारे में, जिससे देश के अधिकतर लोग अभी भी अंजान हैं या दोनों में फर्क नहीं कर पाते हैं। तो चलिए सबसे पहले जानते हैं भारत के राष्ट्रगान के बारे में…  

 

 

 

 

 

क्या है भारत का राष्ट्रगान 



जन-गण-मन अधिनायक जय हे

भारत भाग्य विधाता। 

पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा

द्राविड़-उत्कल-बंग

विंध्य हिमाचल यमुना गंगा

उच्छल जलधि तरंग

तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशीष मांगे

गाहे तव जय-गाथा।

जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता।

जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे। 



यह भारत का राष्ट्रगान है, जिसे अनेक अवसरों पर बजाया या गाया जाता है। इसकी रचना प्रख्यात कवि रविंद्रनाथ टैगोर ने की थी। यह मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया था, लेकिन बाद में इसका हिंदी और अंग्रेजी में भी अनुवाद कराया गया और संविधान सभा द्वारा 24 जनवरी, 1950 को इसे स्वीकार किया गया।  



रविंद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रगान की रचना वर्ष 1911 में ही कर ली थी। इसे पहली बार 27 दिसंबर, 1911 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में गाया गया था। राष्ट्रगान के पूरे संस्करण को गाने में कुल 52 सेकेंड का समय लगता है। 



राष्ट्रगान बजते समय ये सावधानी बरतना न भूलें



अधिकतर लोगों को नहीं पता होता कि राष्ट्रगान बजते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए। दरअसल, राष्ट्रगान जब भी कहीं बजाया जाता है तो देश के प्रत्येक नागरिक का ये कर्तव्य होता है कि वो अगर कहीं बैठा हुआ है तो उस जगह पर खड़ा हो जाए और सावधान मुद्रा में रहे। साथ ही नागरिकों से ये भी अपेक्षा की जाती है कि वो भी राष्ट्रगान को दोहराएं। 



क्या है राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' का अर्थ 



राष्ट्रगान वैसे तो मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया था, जिसमें सिंध का भी नाम था। लेकिन बाद में इसमें संशोधन कर सिंध की जगह सिंधु कर दिया गया, क्योंकि देश के विभाजन के बाद सिंध पाकिस्तान का एक अंग हो चुका था। 



राष्ट्रगान के अंग्रेजी संस्करण से अगर हम इसे हिंदी में अनुवादित करें तो इसका मतलब होता है… 



'सभी लोगों के मस्तिष्क के शासक, कला तुम हो,

भारत की किस्मत बनाने वाले।

तुम्हारा नाम पंजाब, सिन्धु, गुजरात और मराठों के दिलों के साथ ही बंगाल, ओडिसा, और द्रविड़ों को भी उत्तेजित करता है,

इसकी गूंज विन्ध्य और हिमालय के पहाड़ों में सुनाई देती है।

गंगा और जमुना के संगीत में मिलती है और भारतीय समुद्र की लहरों द्वारा गुणगान किया जाता है।

वो तुम्हारे आशीर्वाद के लिये प्रार्थना करते हैं और तुम्हारी प्रशंसा के गीत गाते हैं।

तुम्हारे हाथों में ही सभी लोगों की सुरक्षा का इंतजार है,

तुम भारत की किस्मत को बनाने वाले।

जय हो जय हो जय हो तुम्हारी।' 

भारत का राष्ट्रीय गीत क्या है?

भारत का राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' है। इसके रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय हैं। उन्होंने इसकी रचना साल 1882 में संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में किया था। यह स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। इसे भी भारत के राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' के बराबर का ही दर्जा प्राप्त है। इसे पहली बार साल 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में गाया गया था। राष्ट्रीय गीत की अवधि लगभग 52 सेकेंड है। 



राष्ट्रीय गीत कुछ इस प्रकार है 



वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्!

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥ 



राष्ट्रीय गीत का हिंदी अनुवाद 



मैं आपके सामने नतमस्तक होता हूं। ओ माता,

पानी से सींची, फलों से भरी,

दक्षिण की वायु के साथ शांत,

कटाई की फसलों के साथ गहरा,

माता!

उसकी रातें चांदनी की गरिमा में प्रफुल्लित हो रही है,

उसकी जमीन खिलते फूलों वाले वृक्षों से बहुत सुंदर ढकी हुई है,

हंसी की मिठास, वाणी की मिठास,

माता, वरदान देने वाली, आनंद देने वाली।



'वंदे मातरम्' पर विवाद 



'वंदे मातरम्' पर विवाद बहुत पहले से चला आ रहा है। इसका चयन राष्ट्रगान के तौर पर हो सकता था, लेकिन कुछ मुसलमानों के विरोध के कारण इसे राष्ट्रगान का दर्जा नहीं मिला। दरअसल, मुसलमानों का कहना था कि इस गीत में मां दुर्गा की वंदना की गई है और उन्हें राष्ट्र के रूप में देखा गया है, जबकि इस्लाम में किसी व्यक्ति या वस्तु की पूजा करना गलत माना गया है। 

 
 

 

 

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