ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंध से भारत की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली । ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंध से भारत की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल वह तेहरान से ही आयात करता है। हालांकि पिछले साल जब अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग कर उस पर दोबारा प्रतिबंध लगाया था तो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि भारत केवल संयुक्त राष्ट्र की पाबंदियों का पालन करता है और वह किसी देश द्वारा लगाई गई एकपक्षीय पाबंदी का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है। पिछले दिनों अमेरिका ने ईरान से तेल आयात को लेकर भारत सहित आठ देशों को प्रतिबंध से मिलने वाली छूट की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद हमें ईरान से तेल आयात में कटौती को मजबूर होना पड़ा।
पिछली पाबंदियों के दौरान भारत ने ईरान के साथ कारोबार को बरकरार रखा, हालांकि उसे तेल के आयात में कटौती करनी पड़ी है। इसका कारण ट्रांजैक्शंस के लिए बैंकिंग चैनलों का बंद होना और तेल ढोने वाले टैंकरों को इंश्योरेंस कवर न मिल पाना है। भारत-अमेरिका के संबंधों में कई और पेच हैं, जिन पर ईरान से तेल आयात पर भारत के रुख का असर पड़ सकता है। इनमें व्यापार संबंधी मुश्किलें, रूस के साथ भारत का रक्षा सौदा और अफगानिस्तान शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे हैं। जब किसी पाबंदी के प्रति अधिकतर देशों में व्यापक सहमति हो तो भारत द्वारा इसे नजरअंदाज करना बेहद मुश्किल काम है। साथ ही भारत के साथ कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव से ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों व संस्थानों के लिए चीजें और मुश्किल हो सकती हैं।
