उपचुनाव: उज्जैन के पूर्व सांसद की दावेदारी को लेकर अटकलों का दौर

नागदा। मध्‍यप्रदेश के 24 विधानसभाओं के उपचुनाव में उम्मीदवारों को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई। सिंधिया खेमे के 22 विधायकों के त्यागपत्र तथा दो रिक्त स्थानों पर उपचुनाव होना है। उपचुनाव में 4 सीट मालवा अंचल से जुड़ी है। आगर, सांवेर, सुवासरा एवं बदनावर सीट पर चुनाव है। जिस में से आगर एवं सांवेर अजा सुरक्षित विधानसभा है।
विदित हो कि आगर सीट मंत्री मनोहर उंटवाल के निधन से रिक्त है, जबकि सांवेर क्षेत्र से ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक तुलसीराम सिलावट, सुवासरा से हरदीपसिंह, बदनावर से हर्षवर्धनसिंह दतीगांव के त्यागपत्र से सीट खाली है। उक्त तीनों सीट पर पिछली चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। इन सीटों से जीते विधायक त्यागपत्र देकर सिंधिया के साथ भाजपा में चले गए हैं। सांवेर सीट से पिछलीबार विधायक चुने गए सिलावट वर्तमान में शिवराजसिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री है। मालवा अंचल में एक मात्र मंत्री का उपचुनाव रोमाचंक माना जा रहा है। सिंधिया के कदम भाजपा खेमें में जाने से कांग्रेस को सरकार गंवाना पड़ी है, इसलिए कांग्रेस अब सिंधिया समर्थकों की घेराबंदी कर प्रतिशोध तो लेना चाहती है, साथ ही अपनी सरकार फि र बनाने के लिए रणनीति में जुटी है।
मंत्री सिलावट की सीट पर प्रतिष्टा
सांवेर उपचुनाव में अधिक प्रतिष्टापूर्ण मानी जा रही है। इस सीट से 2018 के विधानसभा में महज 2945 वोटों से सिलावट को जीत मिली थी। कांग्रेस की टिकट पर उन्होंने 96,535 वोट पाए थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी राजेश सोनकर के पक्ष में 93,590 मत गिरे थे। इस सीट से फि र सिलावट का चुनाव लडऩा तय माना जा रहा है। अंतर यह हैकि पिछला चुनाव कांग्रेस की टिकट पर था, अब वे भाजपा से किस्मत आजमाएंगे। अधिकांश मैदानी कार्यकर्ताओं के चेहरे बदल जाएंगे।
सांवेर सीट पर कांग्रेस की बात की जाए तो उज्जैन के पूर्व कांग्रेस सांसद प्रेमचंद गुड्डू के नाम पर अटकलों का दौर हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के समय प्रेमचंद कांग्रेस को छोडक़र भाजपा में चले गए थे और अपने पुत्र अजीत बौरासी को उज्जैन जिले की घटिया सुरक्षित सीट से भाजपा का टिकट दिलाया था, हालांकि अजीत कांग्रेस के रामलाल मालवीय से चुनाव हार गए । पिछले कई दिनों से प्रेमचंद़ गुड्डू की कांग्रेस वापसी की चर्चाओं के दौर चले, लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने से उनकी आवश्यकता को बल नहीं मिला।
उपचुनाव में कांग्रेस एक-एक सीट पर सरकार में वापसी के लिए आंखे गड़ाए बैठी हैं। सांवेर सीट पर एक मंत्री को पटकनी देने के लिए कांग्रेस को एक वजनदार चेहरे की तलाश है। प्रेमचंद्र की कांग्रेस में वापसी सारे गिले- शिकवों को दूर कर अटकलों को बाजार गर्म है।
सांवेर से जीता था चुनाव
कांग्रेस अब प्रेमचंद पर इसलिए दांव खेल सकती है कि वे सांवेर से 1998 में कांग्रेस की टिकट पर जीते थे। प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष किसी समय थे, ऐसी स्थिति में उनके समर्थक कई जगह पर है। उज्जैन से वे पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनाराण जटिया को हराकर सांसद बने थे। सांवेर की दूरी उज्जैन एवं इंदौर से नजदीक है। गूड् को दोनों स्थानों से कार्यकर्ताओं की टीम मिल सकती है।
भाजपा इन रणनीतियां कर सकती काम
मंत्री सिलावट की पिछली जीत के वोटों का अंतर महज 2945 है। भाजपा को भी अपनी सरकार बचाने के लिए पूरा खेल इन उपचुनावो पर टीका है। एक ‑एक सीट पर सोच ‑समझ कर रणनीतियों को अंजाम देना है।
सांवेर सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सोनकर ने 93590 वोट लाकर कांग्रेस प्रत्याशी सिलावट से अच्छा मुकाबला किया था। इसलिए वे एक बार फिर कांग्रेस के किसी भी उम्मीदवार से कड़ी टक्कर देने में समर्थ हैं। इन्हें भाजपा एक बार फि र सांवेर से मौक दे सकती है, तो कई मायनों में समीकरण आसान संभव है।
3 सांवेर से पिछला चुनाव हारे भाजपा के सोनकर को आगर भेजने का भी एक समीकरण है। इस प्रकार के निर्णय से उनके समर्थकों के गुस्से का इजहार सिलावट पर नहीं होगा। सांवेर में भाजपा से सिलावट को मैदान में उतारने से पिछले चुनाव के भाजपा उम्मीदवार सोनकर की नाराजगी संभव है। वे पिछले चुनाव में पराजय के बाद एक वजनदार उम्मीदवार साबित हुए थे। उक्त समीकरण से समस्या का निराकरण संभव है।
4 विकल्प यह भी भाजपा प्रेमचंद को कांग्रेस में जाने से रोके, और आगर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी बनाने का प्रलोभन दे। उन्हें यह बताया जा सकता है कि प्रदेश में उपचुनाव के बाद भाजपा की सरकार ही बनने के ज्यादा आसार है। ऐसी स्थिति में आगर में चुनाव लडऩे से गुड्डू का मुकाबला सांवेर से टल जाएगा। आगर में पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार विपिन वानखेड़े थे। अबकि बार भी पूरी संभावना है कि कांग्रेस एक बार फि र वानखेड़े पर इसलिए दाव लगाएंगी कि वे मनोहर उंटवाल से मात्र 2490 वोटों के अंतर से पराजित हुए । इस प्रकार के समीकरण से भाजपा को मंत्री सिलावट के चुनाव को आसान बनाकरदोनों सीटो पर राह आसान हो सकती है।

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