ऑटो टैक्सी यूनियन ने सैद्धांतिक समर्थन देते हुए हड़ताल न करने का फैसला किया

दिल्ली | ऑटो टैक्सी यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा कि पहले भी हमने किसानों द्वारा भारत बंद का समर्थन किया था, लेकिन अपने ऑटो और टैक्सी को चलाना जारी रखा था। इस बार भी हम किसानों का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन हड़ताल नहीं कर हैं क्योंकि वैश्विक महामारी के समय कम हुई कमाई के कारण हमारे सदस्य काफी संकट में हैं।
केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 40 किसान यूनियनों द्वारा आज बुलाए गए 'भारत बंद' के बावजूद दिल्ली में ऑटो-रिक्शा तथा टैक्सी सामान्य रूप से सड़कों पर चलती नजर आईं और अधिकतर दुकानें भी खुली दिखीं। उनकी यूनियन तथा संघों ने किसानों के बंद को केवल ''सैद्धांतिक समर्थन'' देते हुए हड़ताल न करने का फैसला किया है।ऑटो, टैक्सी यूनियन और व्यापारी संघों का कहना है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के कारण उनकी आजीविका पहले ही बुरी तरह प्रभावित हुई है, इसलिए वे किसी भी हड़ताल में शामिल नहीं हो रहे हैं।
'कैब संघों' का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली के 'सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन' ने भी किसानों का समर्थन किया, लेकिन हड़ताल में शामिल नहीं हुए। एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने कहा कि हम किसानों के समर्थन में हैं, लेकिन वैश्विक महामारी के कारण हमारा काम प्रभावित हुआ है और हम उनके समर्थन में हड़ताल करके खुद नुकसान नहीं उठा सकते, अन्य ऑटो तथा टैक्सी यूनियन की भी यही राय है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ऑटो चालक संघ के सचिव अनुज राठौड़ ने कहा कि हम किसानों का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन कोविड-19 के कारण जो वित्तीय संकट हमने उठाया है, उसे देखते हुए हम सामान्य रूप से काम करते हुए उन्हें और उनकी मांग को अपना नैतिक एवं सैद्धांतिक समर्थन दे रहे हैं।
'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (सीटीआई) के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि शहर में बाजार और दुकानें खुली हैं क्योंकि किसानों ने हड़ताल के लिए हमारे संघ से कोई सम्पर्क नहीं किया। उन्होंने कहा कि साथ ही, त्योहारों के नजदीक होने के चलते यह व्यापारियों का वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के कारण हुए नुकसान से उबरने का समय है। हालांकि हम किसानों का पूरा समर्थन करते हैं और सरकार से उनकी मांग पूरी करने की अपील करते हैं।
उन्होंने कहा कि व्यापारी, किसानों और उनकी मांगों का समर्थन करते हैं, लेकिन वे दुकानें बंद करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि वे अपने व्यापार एवं व्यवसायों पर वैश्विक महामारी के प्रतिकूल प्रभाव के कारण पहले से ही संकट में हैं।
