करप्शन से लड़ने में एंटी करप्शन ब्यूरो को रुचि नहीं

मुंबई। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानि एंटी करप्शन ब्यूरो जिसका काम भ्रष्टाचार खत्म करना और दोषियों के खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई करना है. लेकिन एक आरटीआई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा केवल पांच एफआईआर दर्ज की गई हैं जबकि इस साढ़े तीन सालों के समय में एंटी करप्शन ब्यूरो के पास ग्यारह हजार से भी अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं. आपको बता दें कि एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा तीन प्रकार के मामलों की जांच की जाती है, जिसमें जालसाजी, करप्शन और बेनामी संपत्ति के मामले आते हैं. जालसाजी के मामलों में एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा रंगे हाथों भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा जाता है. इसका मतलब तो यही हुआ कि एंटी करप्शन ब्यूरो सिर्फ रंगे हाथों भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ना चाहती है और अपने पास आनेवाली शिकायतों पर ध्यान देने में इसे कोई रुचि नहीं है. दरअसल आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र घागडे द्वारा प्राप्त आरटीआई की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि साल २०१५ से ३० मई २०१९ तक एंटी करप्शन ब्यूरो की मुंबई शाखा के पास कुल ११,३२२ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें दर्ज हुई, जिसमें से मात्र ३५७ मामलों में ही एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच के निर्देश दिए. उनमें से मात्र पांच मामलों की ही एफआईआर दर्ज की गई. आरटीआई रिपोर्ट के मुताबिक एंटी करप्शन ब्यूरो करप्शन से लड़ने में कोई रुचि नहीं ले रही और ऐसी घटनाओं पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जिनमें भ्रष्ट व्यक्ति को रंगेहाथों पकड़ा जा रहा है. रिपोर्ट में यह सामने आया है कि एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा ७,३४७ मामलों की जांच किए बिना ही उन्हें अन्य सरकारी विभागों में भेज दिया. एंटी करप्शन ब्यूरो के अनुसार सरकारी विभागों को उन पर कार्रवाई करनी चाहिए जबकि मुंबई हाईकोर्ट के आदेशानुसार एंटी करप्शन ब्यूरो को ही इन मामलों पर कार्रवाई करनी चाहिए. जितेंद्र घाड़गे का कहना है कि यह कोर्ट के आदेश की अवहेलना है.
