किसी युवा नेता को होना चाहिए मध्य प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष: दिग्विजय सिंह

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने प्रदेश कांग्रेस (MP Congress) का नया अध्यक्ष एक युवा को बनाए जाने की इच्छा जताई है.
दरअसल, ग्वालियर (Gwalior) में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष किसी युवा (Youth) चेहरे को बनाना चाहिए या वरिष्ठ (Senior) नेता को? इस पर जवाब में दिग्विजय ने कहा कि हांगकांग (Hong Kong) में 22 और 26 साल के लड़के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. अब आप बताओ किसको होना चाहिए प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष.’
सोनिया गांधी जिस दिन तय कर लेंगी, उस दिन घोषित हो जाएगा नाम
दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस दिन सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) तय कर लेंगी उस दिन प्रदेश का नया अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. फिलहाल, पद खाली नहीं है क्योंकि उस पद पर अभी प्रदेश के सीएम कमलनाथ (CM Kamal Nath) पदस्थ हैं. मीडिया ने जब दिग्विजय से उनसे प्रदेश अध्यक्ष बनने का सवाल किया तो वे उसे टाल गए. वहीं दिग्विजय के साथ मौजूद सहकारिता मंत्री (Cooperative Minister) डॉ. गोविंद सिंह (Dr. Govind Singh) से जब नए अध्यक्ष के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'मेरे कहने से कोई किसी को अध्यक्ष थोड़े ही बना देगा. हालांकि हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का पूरा हक है.'
ग्वालियर कांग्रेस कमेटी ने सिंधिया के नाम का प्रस्ताव दिल्ली भेजा
ग्वालियर कांग्रेस कमेटी (Gwalior Congress Committee) ने कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का समर्थक किया है. कमेटी ने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस बारे में प्रस्ताव भी भेज दिया है. मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi), प्रद्युम्न सिंह तोमर (Pradhuman Singh Tomar) के बाद परिवहन मंत्री (Transport Minister) गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajput) ने भी कहा कि सिंधिया की गिनती प्रदेश के बड़े नेताओं में होती है. प्रदेश अध्यक्ष बनने या न बनने का निर्णय उनको और पार्टी हाईकमान को लेना है. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का भावुक होना उनका अपने नेता के प्रति लगाव को दर्शाता है. बहरहाल, प्रदेश का नया अध्यक्ष युवा और ऊर्जावान होना चाहिए.
इधर, दिल्ली में एमपी के नए प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर केंद्रीय नेतृत्व द्वारा बीच का रास्ता निकालने का प्रयास जारी है. ऐसे नामों पर चर्चा हो रही है जिस पर बिना विलंब किए सर्वसम्मति बन जाए. इसमें जातिगत समीकरणों का ध्यान भी रखा जा रहा है.
