केरल में निपाह वायरस से एक और मौत- कोझिकोड में ट्यूशन और परीक्षा पर रोक

कोझिकोड (केरल).केरल के कोझिकोड में गुरुवार को निपाह वायरस से संक्रमित होकर एक और शख्स की मौत हो गई, 5 की हालत नाजुक है। राज्य में इस वायरस से अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है। वायरस से संक्रमित 14 नए मरीज मिले हैं। प्रशासन ने ऐहतियातन कोझिकोड में ट्यूशन, ट्रेनिंग और पब्लिक मीटिंग पर रोक लगा दी है। निपाह से राज्य में पहली मौत 19 मई को हुई थी।


परिवार के 3 सदस्यों की गई जान


– एजेंसी के मुताबिक, गुरुवार को मूसा की इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे पहले इसी महीने में उनके दो बेटे और एक रिश्तेदार की मौत हो गई थी। यह इस वायरस से हुई मौत का पहला केस था।


31 मई तक कोचिंग-ट्रेनिंग- परीक्षा पर रोक


– कोझिकोड के कलेक्टर यूवी जोशी ने 31 मई तक सभी पब्लिक मीटिंग पर बैन लगा दिया है। यहां तक की इलाके में कोई भी कोचिंग और ट्रेनिंग भी नहीं होगी। प्रशासन ने इस हफ्ते में होने वाली सभी परीक्षाओं पर रोक लगा दी है।

– हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक, अब तक 160 संदिग्ध लोगों के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। जिनमें से 22 के नतीजे आ गए हैं। इनमें से 14 संक्रमित पाए गए हैं।

– कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में 160 और मलापुरम में 24 लोगों को निगरानी में रखा गया है।


केरल के अलावा 4 राज्यों में अलर्ट


– केरल के अलावा चार अन्य राज्यों में भी निपाह को लेकर सावधानी बरतने के लिए एडवाइजरी और अलर्ट जारी किए गए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर, गोवा, राजस्थान और तेलंगाना शामिल हैं। 

– केरल सरकार ने लोगों को चार जिलों कोझिकोड, मलापुरम, वायनाड और कन्नूर में नहीं जाने की सलाह दी है। इन चारों जिलों में निपाह का सबसे ज्यादा संक्रमण देखा जा रहा है। उधर, गोवा में भी इस पर नजर रखने के लिए एक टीम बनाई गई है।


क्या होता है निपाह वायरस?


– फ्रूट बैट या सूअर जैसे जानवर इस वायरस के वाहक हैं। संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है। निपाह वायरस से संक्रमित इंसान भी संक्रमण को आगे बढ़ाता है।


– 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।


– 2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि केरल में यह पहली बार फैला है।


सांस लेने में होती है दिक्कत


– इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है।


कोई वैक्सीन नहीं


– विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।


– इस बीमारी से बचने के लिए खजूर, उसके पेड़ से निकले रस और पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर, घोड़ों और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।


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