कैबिनेटः 35 की जगह 25 एकड़ में खोल सकेंगे निजी विश्वविद्यालय, 2 अगस्त से मानसून सत्र

पंजाब में अब निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना 25 एकड़ क्षेत्र में हो सकेगी। 35 एकड़ जरूरी जमीन के फैसले को बदलते हुए पंजाब कैबिनेट ने पंजाब प्राईवेट यूनिवर्सिटी पॉलिसी-2010 में संशोधन को मंजूरी दे दी।सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में निवेश को बढ़ावा देना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षा के मानक मापदंडों को यकीनी बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कुछ निजी विश्वविद्यालयों वह पाठ्यक्रम लागू कर रही हैं, जिनका व्यावहारिक प्रयोग नहीं है और यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को रोजगार मुहैया कराने में नाकाम रहे हैं।
कैप्टन ने राज्य में निजी विश्वविद्यालयों के लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी स्थापित करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए अपनी सरकार द्वारा स्थापित की गई कैबिनेट सब-कमेटी और विशेषज्ञ कमेटी की प्रगति की जानकारी भी हासिल की।
उन्हें बताया गया कि विशेषज्ञ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है जो अगली कार्यवाही और सिफारिशों के लिए कैबिनेट सब-कमेटी को जल्द ही भेज दी जाएगी।
कैबिनेट द्वारा बुधवार को स्वीकृत किया गया संशोधन, पॉलिसी में दर्ज अन्य शर्तों के अमल पर निर्भर करेगा, जिसके मुताबिक न्यूनतम 25 एकड़ जमीन का स्वामित्व या केंद्रीय रेगुलेटरी एजेंसी के नियमों के अनुसार एक काट में जमीन, या जो भी अधिक हो, उसके सबूत पेश करने होंगे।
यह फैसला राज्य में अन्य राज्यों के मुकाबले जमीनों की ऊंची कीमतों के मद्देनजर भी लिया गया है। बता दें कि हरियाणा में निजी विश्वविद्यालय निगम क्षेत्र के बाहर 20 एकड़ और निगम क्षेत्र में 10 एकड़ जमीन होनी जरूरी है। हिमाचल प्रदेश में 10 एकड़, राजस्थान में 30 एकड़ और मध्य प्रदेश में 20 एकड़ जमीन की जरूरत होती है।
कैप्टन ने रिलीज की टेबल कॉफी बुक
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व समारोहों की श्रंखला में बुधवार को राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित की गई कॉफी टेबल बुक का पहला अंक जारी किया। 70 पन्नों की यह किताब प्रकाश पर्व के समारोहों की श्रृंखला में नवंबर, 2018 से जून, 2019 तक हुए विशेष समारोहों का विस्तार में वर्णन करती है।
इन समारोहों में करतारपुर कॉरिडोर का नींव पत्थर रखने के साथ-साथ इस ऐतिहासिक अवसर को समर्पित बुनियादी ढांचों के विकास से जुड़े अन्य कार्य शामिल हैं। इसी तरह राज्य सरकार द्वारा प्रकाश पर्व के अवसर पर शुरु किए गए अन्य कार्यों को भी इस किताब में विधिपूर्वक दर्शाया गया है।
इनमें पिंड बाबे नानक दा, बेबे नानकी कॉलेज फॉर गर्ल्स, आला दर्जे का ऑडीटोरियम, हरेक गाँव में 550 पौधे लगाने, नानक बगीची, सरबत सेहत बीमा योजना और पवित्र काली वेईं की सफाई के प्रयास मुख्यतौर पर शामिल हैं।
यह किताब श्री गुरु नानक देव जी के जीवन और उपदेशों का प्रसार करने के लिए सेमिनार, कवि दरबार, लेख लिखने के मुकाबलों और सप्ताह के आखिर में लीग खेलों द्वारा की गई अन्य गतिविधियों पर भी रोशनी डालती है।
इसी तरह यादगारी सिक्के, वृत्तचित्र और नाटक, गुरमत संगीत सम्मेलन, गीत, विचार-विमर्श और काव्य रचना, सवाल-जवाब, रबाब उत्सव और दस्तारबंदी जैसी अन्य विशेष गतिविधयाँ भी किताब का मुख्य आकर्षण हैं।
पंचायतों को जल सप्लाई के बिलों का करना होगा नियमित भुगतान
गांवों को पेयजल की निर्वाध सप्लाई के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य में ग्रामीण जल सप्लाई स्कीमों (आरडब्ल्यूएस) के बकाये के भुगतान का एकमुश्त निपटारा (ओटीएस) करने को मंजूरी दे दी है। इससे वित्त विभाग द्वारा इन स्कीमों के लिए 298.61 करोड़ रुपए के फंड जारी करने का रास्ता साफ हो गया है, जिनका जल सप्लाई एवं सेनिटेशन विभाग द्वारा प्रबंधन किया जाता है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि बिलों का एकमुश्त भुगतान और निपटारा कुछ शर्तों के अनुसार होगा। ग्राम पंचायत की जल सप्लाई और सेनिटेशन कमेटी को यह लिखित जिम्मेदारी लेनी होगी कि वह भविष्य में पानी के प्रयोग शुल्क एकत्रित करेगी और अगले बिलों का नियमित रूप से भुगतान करेगी।
घपलेबाजी और प्रयोग शुल्क के एकत्रीकरण/रुकावट का अगर कोई मामला सामने आता है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि बिजली के बिलों के भुगतान न करने के कारण लगातार बिजली सप्लाई काटे जाने के नतीजे के तौर पर इससे पहले गांवों में पीने के पानी की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे ग्रामीण इलाकों में विभिन्न जल सप्लाई स्कीमों के कामकाज पर बुरा प्रभाव पड़ा।
इसके बाद जल सप्लाई और सेनिटेशन विभाग ने 690 करोड़ रुपए की लंबित राशि पर ब्याज और जुर्माना माफ करने के लिए यह मामला पावरकॉम (पीएसपीसीएल) को भेजा क्योंकि ग्रामीण जल सप्लाई स्कीमों का प्रबंधन जल सप्लाई और सेनिटेशन विभाग द्वारा किया जाता है। पीएसपीसीएल और पंजाब राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोग ने विभाग की अपील को स्वीकार कर 198.21 करोड़ रुपए की माफी का आदेश जारी कर दिया गया।
यह जल सप्लाई एंड सेनिटेशन विभाग के प्रबंधन वाली ग्रामीण जल सप्लाई स्कीमों और ग्राम पंचायत जल सप्लाई कमेटी (जीपीडब्ल्यूएससी), दोनों के लिए जारी किया गया था। वित्त विभाग द्वारा ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग को पहले ही हिदायतें जारी की जा चुकी हैं कि ग्राम पंचायत जल सप्लाई कमेटियों द्वारा चलाई जा रही जल सप्लाई स्कीमों संबंधी 193.18 करोड़ रुपए की राशि का निपटारा 13वें वित्त आयोग के अनुदान में से या ग्रामीण विकास फंड में से एक मुश्त अनुदान के रूप में किया जाये।
चार विभागों के लिए चार वर्षीय कार्य योजना को हरी झंडी
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में बुधवार को मंत्रिमंडल ने राज्य के पर्यटन और सांस्कृतिक मामले, जल सप्लाई और सेनिटेशन, लोक निर्माण विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) निर्धारित करने के लिए चार वर्षीय रणनीतिक कार्य योजना (4 एसएपी)-2019 को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। इस कार्य योजना पर मंत्रिमंडल की बैठक में विचार किया गया।
इसके अधीन सरकारी मुलाजिमों के लिए कार्यप्रणाली के मापदंड भी कायम किए जाएंगे और राज्य की विकास प्रक्रिया में विभागों का आपसी तालमेल भी कायम होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह मुख्य मापदंड संयुक्त राष्ट्र के 2030 के विकास एजेंडे की रूपरेखा के तहत होंगे। इसमें 17 स्थापित विकास लक्ष्य (एसडीजी) हैं, जो सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण प्रसार को व्यापक तौर पर अपने अधीन लाते हैं।
लक्ष्यों के आधार पर विभागों की कारगुजारी मुलाजिमों की वार्षिक अप्रेजल रिपोर्ट में दर्ज की जाएगी। स्थापित विकास उद्देश्यों और लक्ष्यों की रूपरेखा प्रशासनिक विभागों के साथ तय की गई है। प्रत्येक एसडीजी को एक नोडल विभाग सौंपा गया है क्योंकि यह लक्ष्य विभिन्न विभागों से संबंधित हैं।
इसके अलावा राज्य ने भारत सरकार के स्वीकृत राष्ट्रीय सूचकांक ढांचे को अपनाया है। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र के एसडीजी की प्रगति की उचित योजना, लागू करने और निगरानी करने के लिए राज्य सरकार ने पहले ही वित्त मंत्री के नेतृत्व में टास्क फोर्स का गठन किया है और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संचालन कमेटी नियुक्त की गई है।
पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र 2 से 6 अगस्त तक
कैबिनेट ने पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 2 से 6 अगस्त तक बुलाने का फैसला लिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। भारत के संविधान की धारा 174 की क्लॉज (1) के अंतर्गत 15वीं विधानसभा का आठवां सत्र बुलाने के लिए पंजाब के राज्यपाल को अधिकृत किया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह सत्र 2 अगस्त को दोपहर बाद शुरू होगा और उस दिन दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि भेंट की जाएंगी। इसके बाद वैधानिक कामकाज 5 अगस्त को सुबह 11 बजे और 6 अगस्त को सुबह 10 बजे शुरू होगा। 06 अगस्त को प्रस्तावित वैधानिक कामकाज के बाद सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जायेगा।
गोबिंदगढ़ किले का म्यूजियम देखने को लगेगी टिकट
अमृतसर स्थित गोबिंदगढ़ किले में संग्रहालय के परिचालन, रख रखाव और सुधार के खर्चों को पूरा करने के लिए अब एंट्री टिकट लगाई जाएगी। इसमें पांच साल तक के बच्चों को छूट मिलेगी। यह फैसला बुधवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, कैबिनेट ने विभिन्न श्रेणियों के संग्रहालयों के प्रवेश टिकट संबंधी पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस प्रकार प्रवेश टिकटों से एकत्रित राशि पंजाब हेरिटेज एंड टूरिज्म प्रमोशन बोर्ड के पास जमा की जाएगी और इसका उपयोग संग्रहालयों के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन के लिए किया जाएगा। यदि प्रवेश टिकटों से एकत्र की गई राशि पर्याप्त नहीं है, तो अंतर विभागीय बजटीय अनुदान से इसे पूरा किया जाएगा।
विभाग ने वयस्कों के लिए प्रवेश टिकट 30 रुपये, 18 वर्ष तक के युवाओं/विद्यार्थियों के लिए 20 रुपये, वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) के लिए 20 रुपये, रक्षा कर्मियों के लिए 20 रुपये और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए 20 रुपये निर्धारित किया है।
द आर्म्स म्यूजियम और सिक्के संग्रहालय में प्रवेश के लिए टिकट की दर पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री द्वारा अनुमोदन के बाद पंजाब हेरिटेज टूरिज्म प्रमोशन बोर्ड की ओर से प्रतिवर्ष संशोधित की जाएगी लेकिन यह बढ़ोतरी अधिकतम 5 रुपये प्रति टिकट होगी।
निजी मार्केट यार्ड बनाने वालों को एमएमपी पर शुल्क से राहत
पंजाब मंत्रिमंडल ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 2 प्रतिशत अदायगी से छूट प्राप्त करने के लिए प्राईवेट मार्केट यार्ड स्थापित करने की छूट देने का फैसला किया है। यह फैसला औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया है जो राज्य में व्यापार को आसान बनाने के लिए सरकार के यत्नों का एक हिस्सा है।
मंत्रिमंडल की मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस कदम से फूड प्रोसेसिंग इकाइयों द्वारा किसानों के उत्पादों की सीधी खरीद को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। इस संबंध में औद्योगिक और बिजनेस विकास नीति 2017 की धारा 10.11.3 में संशोधन को मंज़ूरी दी गई है।
प्रवक्ता के अनुसार, एंकर इकाइयों को पंजाब एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड द्वारा जारी किए लाइसेंसों की शर्त से निजी मार्केट यार्डों को एमएसपी से 2 प्रतिशत अदायगी करके व्यवस्था 10.11.3 को जोड़कर प्रोत्साहित किया गया था। इसे पिछले साल अगस्त में नोटिफाई किया गया था।
एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने इंडस्ट्रियल प्रमोशन (आर) 2013 में वित्तीय प्रोत्साहन संशोधन के लिए मंजूरी दे दी है, जिसमें एफआईआईपी (आर) के अधीन वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए तौर-तरीकों के अध्याय 2 में संशोधन भी शामिल है। यह संशोधन 17 अक्तूबर, 2017 को नोटिफाई की गई औद्योगिक और बिजनेस विकास नीति 2017 के अधीन वित्तीय प्रेरणा लेने की प्रक्रिया के अनुरूप हैं।
‘मेक इन पंजाब’ के लिए स्थानीय उत्पादकों को मिलेगा प्रोत्साहन
पंजाब उत्पादन को बढ़ावा देते हुए राज्य कैबिनेट ने मेक इन पंजाब ऑर्डर-2019 के लिए सार्वजनिक खरीद प्राथमिकता को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक खरीदारी में स्थानीय उत्पादकों को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही यह राज्य में आय बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के लिए भी यह मददगार होगा।
कैबिनेट ने राईट्स ऑफ पर्सन विद डिस्एबिलिटीज एक्ट -2016 के अधीन ‘द पंजाब राइट्स ऑफ पर्सन विद डिस्एबिलिटीज़ रूल्स -2019’ को भी मंजूरी दे दी है। जिससे समाज की मुख्य धारा में दिव्यांगों की प्रभावी भागीदारी को यकीनी बनाया जा सके।
