कोरिया शिखर वार्ता के बाद अब ट्रंप-किम मुलाकात की तैयारी

सियोल । ऐतिहासिक कोरिया शिखर वार्ता के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच प्रस्तावित मुलाकात की तैयारी शुरू हो गई है। इन दोनों नेताओं की मुलाकात मई अंत या जून के शुरू में होने की संभावना है।


दशकों पुरानी दुश्मनी को भूलकर उत्तर के नेता किम और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने शुक्रवार को शिखर वार्ता की थी। इसमें कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति के लिए संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। हालांकि प्रायद्वीप में दीर्घकालीन शांति अब भी सवालों के घेरे में है लेकिन विश्लेषकों ने उम्मीद जताई है कि मून और किम ठोस कदमों से तनाव कम करने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि ऐसे कई मसले हैं जिनका दोनों कोरियाई देश अकेले हल नहीं निकाल सकते हैं। इसलिए इन देशों के नेता अंतर कोरियाई संबंधों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही ट्रंप और किम के बीच संभावित वार्ता के लिए जमीन तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के सीनियर एसोसिएट किम संग-ह्वान ने कहा कि कोरिया शिखर वार्ता निकट भविष्य में होने वाली अमेरिका-उत्तर कोरिया वार्ता की तैयारी मात्र थी। आने वाले हफ्ते दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के लिए काफी व्यस्त होंगे। ट्रंप-किम वार्ता से पहले मून अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं। वह जापान और चीन के अपने समकक्षों से भी मुलाकात कर सकते हैं।


ऐतिहासिक वार्ता से शांति के नए युग की हुई शुरुआत


उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने कहा कि ऐतिहासिक शिखर वार्ता से मेल-मिलाप, एकता और शांति के नए युग की शुरुआत हुई। दोनों देशों के नेताओं ने संयुक्त घोषणा पत्र में कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त करने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की है।

दक्षिण कोरिया के खुफिया अधिकारी ने निभाई अहम भूमिका


दक्षिण कोरिया के खुफिया अधिकारी सुह हुन ने शुक्रवार को हुई कोरिया शिखर वार्ता में अहम भूमिका निभाई थी। इस वार्ता को ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि 1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद पहली बार उत्तर कोरिया के नेता ने दक्षिण कोरिया में कदम रखा। हुन ने प्योंगयांग में साल 2000 और 2007 में हुई शिखर वार्ताओं में भी मदद की थी।


सेना रखने पर सहयोगियों से बात करेगा अमेरिका


अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिकी फौज को बनाए रखने की जरूरत पर सहयोगी देशों के साथ चर्चा की जाएगी। इसके बाद उत्तर कोरिया के साथ भी इस मसले पर बात होगी।


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