कोरोना, मानसून के कारण सितंबर तक टल सकते हैं विधानसभा उप चुनाव !
भोपाल| कोरोना के फैलाव और मानसून के आगमन के कारण मध्य प्रदेश में विधानसभा उप चुनाव सितंबर तक टालने पड़ सकते हैं। चुनाव आयोग ने जौरा सीट के उप चुनाव कराने की 6 माह की अवधि खत्म होने पर अवधि बढ़ाने का प्रमाण पत्र जारी किया है. उसी में यह संकेत दे दिए हैं कि जून जुलाई के महीने में चुनाव प्रक्रिया संपादित कराना मुश्किल काम है. अगस्त में मानसून के कारण पोलिंग पार्टी और मशीनों को परिवहन करना और मतदाताओं को बूथ तक लाना असंभव काम है. कोरोना संक्रमितों की तेजी से बढ़ती संख्या, प्रवासी मजदूरों के बड़ी तादाद में घर लौटने से बढ़े खतरे और आसन्न मानसून को देखते हुए चुनाव आयोग को विधानसभा के उपचुनाव सितंबर तक टालने पड़ सकते हैं. राज्यों के मुख्य चुनाव पदाधिकारियों ने इस बारे में भारत निर्वाचन आयोग को अवगत कराया है कि जून जुलाई के महीने में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराना कठिन काम है.
ऐसे संकेत भारत निर्वाचन आयोग के 4 जून 2020 के उस प्रमाण पत्र से मिलते हैं, जिसमें जौरा सीट के उप चुनाव की छह माह की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद हालात ठीक होने तक चुनाव स्थगित करने का प्रमाण पत्र जारी किया गया है। प्रमुख सचिव सुमित चक्रवर्ती के हस्ताक्षर वाले इस प्रमाण पत्र में उन कारणों का खुलासा किया गया है, जो जून-जुलाई में उप चुनाव संपन्न कराने में बाधक हैं। आगर मालवा सीट पर भी 29 जुलाई तक छह माह की अवधि समाप्त होने वाली है।विधानसभा में रिक्तियों वाले राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, भारत निर्वाचन आयोग को पहले ही बता चुके हैं कि जून-जुलाई में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराना मुश्किल है। कोरोना के कारण संक्रमितों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। अगस्त में मानसून के कारण दूर-दराज के इलाकों तक पोलिंग पार्टी पहुंचाना और लोगों को बूथ तक लाना प्रशासन के लिए दुष्कर काम होगा। बड़ी संख्या में मजदूरों के लौटने के कारण प्रशासन पर पहले ही काफी दबाव है। इसलिए एक रास्ता नजर आता है कि चुनावों को सितंबर महीने तक टाला जाए। इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधायक कुणाल चौधरी के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद राजनीतिक हलकों में खासी दहशत है। चौधरी के संपर्क वाले दूसरे कई नेता भी पॉजिटव निकल सकते हैं। शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार ने भी शिवराज सरकार पर हमला बोला है कि एक तरफ लोग कोरोना से मारे जा रहे हैं, और सरकार उप चुनाव की तैयारी में लगी है। उससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस उप चुनावों को टाले जाने के पक्ष में दिखाई देती है। रणनीतिक रूप से भी कांग्रेस को चुनाव देरी से कराना ज्यादा फायदेमंद नजर आता है।चुनाव आयोग ने जौरा सीट के मामले में कारण बताया है कि उप चुनावों के दौरान कोविड-19 का तेजी से प्रसार हो सकता था, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोग संपर्क में आते और उनके संक्रमित होने का खतरा बरकरार था, इसलिए निर्धारित अवधि में चुनाव संपन्न नहीं कराए जा सके। 4 जून के इसी पत्र में आयोग ने तर्क दिया है कि जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 151ए के मुताबिक चुनाव कराना संभव नहीं है, क्योंकि संचालन तंत्र (लॉजिस्टिक्स), ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की तैयारी और महामारी के हिसाब से निर्वाचन तंत्र का प्रशिक्षण कराने में काफी समस्याएं हैं। लोगों को बड़ी संख्या में एकत्र करने से संक्रमण और बढ़ सकता है।
ये सभी कारण आज भी पहले की तरह बरकरार हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग ने 22 मई 2020 को रिक्तियों वाले राज्यों के मुख्य चुनाव पदाधिकारियों से परामर्श लिया था। इसमें इन चुनाव पदाधिकारियों ने जून-जुलाई के महीनों में चुनाव कराने में असमर्थता व्यक्त की थी। उनका कहना था कि सोशल डिस्टैंसिंग के जो कायदे कानून अभी लागू हैं, उसमें उम्मीदवारों के लिए कैंपेन करना संभव नहीं है। वहीं आयोग के सामने बड़ा सवाल है कि सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करते हुए पोलिंग पार्टी को बूथों तक कैसे पहुंचाया जाएगा। अभी राज्य में सार्वजनिक वाहन भी चलने शुरु नहीं हुए हैं। बसों के ड्राइवर अपने घरों को लौट गए हैं और वे अब तक वापस काम पर नहीं आए हैं।
क्या हैं कारण
1. कोरोना से संक्रमितों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर लोगोंं के संपर्क में आने के कारण संक्रमण फैल सकता है।
2. अब 15 जून से मानसून की बारिश शुरु होने वाली है और किसान भी बोहनी में व्यस्त हो जाएंगे। जुलाई अगस्त में भारी बारिश के कारण चुनाव कराना मुश्किल काम है।
3. मजदूर बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से लौटे हैं। इन्हें रोजगार, आर्थिक मदद उपलब्ध कराने के अलावा संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन पर भारी दबाव है।
4. कोविड-19 के नए प्रोटोकॉल के मुताबिक चुनावी दलों को प्रशिक्षित करना और निर्धारित स्थानों तक पहुंचाना व वापस लाना प्रशासन के लिए फिलहाल दुष्कर कार्य है।
