कोरोना संक्रमित मरीजों को खराब आवाज का संकट, डॉक्टरों ने बताया चिंता की बात नहीं 

कोलकाता । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कोविड संक्रमित मरीजों को अलग किस्म के संकट का सामना करना पड़ रहा है।कोविड से उबरने के बाद लोगों को कुछ समय के लिए खराब आवाज का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि डॉक्टर्स का कहना है कि यह अस्थायी समस्या है।डॉक्टर ने आश्वस्त किया कि आवाज के आंशिक नुकसान से कोई लंब समय के लिए कोई दिक्कत नहीं होगी। कुछ दिनों के भीतर आवाज वापस लौट आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि फेफड़ों की फाइब्रोसिस या हफ्तों तक आवाज ना निकलने की वजह से आवाज में दिक्कत हो सकती है लेकिन इसकी सीधी वजह कोरोना संक्रमण नहीं है। हो सकता है कि पीड़ित गले के इंफेक्शन से पीड़ित हों जिसकी वजह से उनका गला चोक हो जाए। 
डॉकटरों के अनुसार लोवर रेस्परटरी सिस्टम के साथ-साथ, कोविड ने कुछ पीड़ितों के अपर रेस्परटरी सिस्टम को भी प्रभावित किया है। साथ ही गले के इंफेक्शन के चलते सूजन की समस्या हो सकती है,इसकारण कुछ वक्त के लिए पूरी तरह से आवाज जा सकती है। माना जा रहा है कि कोविड संक्रमित होने के पहले या तीसरे हफ्ते से लेकर 3 महीने तक आवाज की समस्या बनी रह सकती है। हालांकि इससे पूरी वजह से किसी की आवाज नहीं जाएगी लेकिन जो लोग इसका शिकार हुए वह डिप्रेशन में चले गए। 
डॉक्टर ने बताया कि फेफड़ों की क्षमता कम होतीहै,इसकारण बोलना कम हो जाता है।जिन रोगियों को बोलने में कठिनाई होती है और हम उन्हें सलाह देते हैं कि बोलते समय ब्रेक लें।समय के साथ इसमें सुधार होता है क्योंकि संक्रमण ठीक हो जाता है।इस बीच एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि कोविड के वोकल कार्ड्स की सूजन का कारण बन रहा है। जिससे आवाज का नुकसान होता है या इसकी बनावट में बदलाव अक्सर इस कर्कश बना देता है।उन्होंने कहा कि सूजन का इलाज करने के लिए स्टेरॉयड पर्याप्त है। जब सूजन कम होती है,तब आवाज वापस आ जाती है। 

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