क्या आप जानते हैं लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस को लहराने वाला तिरंगा कहां बनता है

नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त पर लाल किले पर फहराया जाने वाला राष्ट्र ध्वज कहां बनता है, इसकी कीमत कितनी होती है और इसे खरीदने के लिए कितने समय पहले ऑर्डर दिया जाता है? अगर नहीं, तो हम आपको बता देते हैं कि इसे कर्नाटक के हुबली में तैयार किया जाता है। इसके लिए खादी का कपड़ा बालाकोट जिले के गांव तुलसीगेरी में बनाया जाता है।
कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (केकेजीएसएसएफ) यह तिरंगा बनाता है, जिसकी कीमत 6,500 रुपए है। यह देश में ऐसा इकलौता संगठन है, जिसे तिरंगा बनाने के लिए भारत सरकार ने लाइसेंस दिया है। यहां ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक झंडे तैयार किए जाते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा निजी संस्थाएं भी जरूरत के हिसाब से ऑर्डर देकर यहीं से तिरंगा मंगाती हैं।
फ्लैग कोड के मुताबिक राष्ट्र ध्वज का आकार 3:2 यानी आयताकार होना चाहिए। यह संस्था 11 अलग-अलग आकार में तिरंगा झंडा बनाती है। जैसे- वीवीआईपी फ्लाइट के लिए 450×300 मिलीमीटर, मंत्रियों की गाड़ियों के लिए 225×150 मिलीमीटर, मेज पर लगाने के लिए 150×100 मिलीमीटर। इनकी कीमत 200 रुपए से लेकर 17 हजार 800 रुपए तक होती है।
लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा 12×8 फीट का होता है। इसे छह चरणों में बनाया जाता है। पहले से हाथ से कताई होती है। फिर बुनाई, रंगाई, चक्र की छपाई, सिलाई और बंधाई करनी पड़ती है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर फहराए जाने वाले तिरंगे का ऑर्डर करीब दो महीने पहले मिल जाता है।
फेडरेशन में 126 कर्मचारी सालभर राष्ट्र ध्वज बनाते हैं। इनमें ज्यातादर महिलाएं हैं। हुबली में खादी संघ का मुख्यालय 17 एकड़ में फैला है।
