क्या आप जानते हो अपने भगवान को

एक राजा था। वह रोज अपने इष्टदेव की बड़ी श्रद्धा से पूजा-पाठ करता था। एक दिन इष्टदेव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए तथा कहा, ‘‘राजन, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं। बोलो तुम्हारी कोई इच्छा है?’’ 

राजा बोला, ‘‘भगवान, मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। फिर भी मेरी एक इच्छा है कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिए।’’ 

भगवान ने राजा को समझाया कि यह तो संभव नहीं है। राजा की जिद के सामने भगवान को झुकना पड़ा। भगवान बोले, ‘‘ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास लाना, मैं पहाड़ी के ऊपर से दर्शन दूंगा।’’ 

राजा ने भगवान को धन्यवाद दिया। राजा ने सारे नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे साथ पहुंचें, वहां भगवान आप सबको दर्शन देंगे। राजा अपनी समस्त प्रजा और स्वजनों के साथ पहाड़ी की ओर चलने लगा। रास्ते में एक स्थान पर तांबे के सिक्कों का पहाड़ देखा। राजा के सतर्क करने के बाद लोभ-लालच में कुछ लोग तांबे के सिक्कों वाली पहाड़ी की ओर भाग गए और सिक्कों की गठरी बनाकर अपने घर की ओर चलने लगे। पहले ये सिक्कों को समेट लें, भगवान से तो फिर कभी भी मिल लेंगे।

राजा खिन्न मन से आगे बढ़ा। कुछ दूर चलने पर चांदी के सिक्कों का चमचमाता पहाड़ दिखाई दिया। इस बार भी बची हुई प्रजा में से कुछ लोग, उस ओर भागने लगे और चांदी के सिक्कों को गठरी बनाकर अपने घर की ओर चलने लगे। ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है। भगवान तो फिर कभी मिल जाएंगे।


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