गुजरात का गणित /मोदी के केंद्र में जाने से कैबिनेट में गुजरात का कद घटा, पर वर्चस्व बढ़ा

अहमदाबाद. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में गुजरात की सभी 26 सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव के समय नरेंद्र मोदी ने वडोदरा से चुनाव लड़ा। परंतु 2019 में गुजरात छोड़कर उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चुनाव लड़ा। इसके बाद 2014 की अपेक्षा 2019 में मोदी के गुजरात छोड़ने के बाद कैबिनेट में गुजरात का कद घटा, तो दूसरी तरफ अमित शाह को कैबिनेट में नम्बर टू का स्थान मिलने से गुजरात का वर्चस्व बढ़ा है।
2014 में तीन सांसदों को मंत्री बनाया था
नरेंद्र मोदी जब पहली बार प्रधानमंत्री बने, तब गुजरात से मोहन कुंडारिया, मनसुख वसावा और हरिभाई चौधरी को मंत्री बनाया गया था। इसके बाद 2016 में मंत्रिमंडल का विस्तार होने पर कुंडारिया-वसावा को हटाते हुए जशवंत सिंह भाभोर को मंत्री बनाया गया। इसके बाद राज्यसभा से मनसुख मंडाविया और परसोत्तम रूपाला को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
इस बार केवल एक को ही मंत्री बनाया
2019 के लोकसभा चुनाव में गुजरात की सभी 26 सीटों पर कब्जा जमाया। इसमें 10 नए सांसद और 16 पुराने सांसद रिपीट हुए हैं। ऐसे में मोदी ने नए मंत्रिमंडल में लोकसभा के लिए पहली बार चुने गए अमित शाह को ही स्थान दिया गया। उधर राज्यसभा से चुने गए रूपाला और मांडविया को मंत्री बनाया गया है। गुजरात में राज्यसभा की कुल 11 सीटेें हैं। इसमें से हाल ही में 2 सीटें खाली हो गई हैं। शेष 9 सांसदों में 5 भाजपा और 4 कांग्रेस के हैं।
