गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र को 300 करोड़ का नुकसान
भोपाल । प्रदेश की राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र को लॉकडाउन में 300 करोड़ रुपये का आकलन उद्योगपति लगा रहे हैं। लॉकडाउन में कारखाने बंद होने से कोरोना के डर से 50 प्रतिशत श्रमिक पलायन कर चुके हैं। गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मानें तो कोरोना वायरस का असर सभी 1100 छोटी-बड़ी इंडस्ट्रीज पर पड़ा है। पूरा वेतन देने के बाद भी श्रमिक काम करना नहीं चाहते। बाकी प्रतिशत श्रमिकों की उद्योगपतियों ने खाने व रुकने की व्यवस्था की है, लेकिन वो भी लॉकडाउन खुलने का समय का इंतजार कर रहे हैं। कोरोना का भय इतना है कि मजदूर कारखानों में काम करना नहीं चाहते। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, होशंगाबाद, बैतूल सहित बिहार, छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों से मजदूर काम करते थे पर कोरोना के डर से आगामी दिनों में भी काम करना नहीं चाहते। इधर भेल कारखाना बंद होने से ट्रांसफार्मर, टरबाइन सहित अन्य भारी उपकरणों के ऑर्डर नहीं मिले हैं। इस बारे में गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत सिंह का कहना है कि लॉकडाउन के अभी 21 दिन पूरे नहीं हुए हैं। 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है। आगे बढ़ाने की भी खबरें सुनने को मिल रही है। यदि लॉकडाउन लंबे समय तक रहा तो उद्योगों को दोबारा उठाना मुश्किल हो जाएगा। 21 दिन के लॉकडाउन के बाद भी उद्योगों को पटरी पर लाने में डेढ़ से दो महीने लगने की उम्मीद है। सरकार उद्योगपतियों का सहयोग करें। अलग-अलग लिए जाने वाले टैक्स में राहत दी जाए। बिजली के बिल माफ हों। वहीं फेडरेशन ऑफ मप्र चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष आरएस गोस्वामी का कहना है कि फार्मा कंपनियों के अलावा बाकी उद्योग ठप हैं। फिर से उद्योगों को चलाने में उद्योगपतियों को कई चुनौतियों से जूझना पड़ेगा। शासन स्तर पर उद्योगपतियों को टैक्स में राहत दी जाए। 21 दिन के लॉकडाउन के बाद तो उद्योगपति स्थिति संभाल लेंगे। यदि इसके बाद लॉकडाउन और होता है तो पूरी तरह से ठप हुए उद्योगों को दोबारा शुरू करने में बहुत कठिनाई होगी। डेढ़ से दो महीने उद्योगों को संभालने में ही लग जाएंगे।
