चमकी बुखार का भय, लीची की बिक्री पर भारी असर

मुंबई। बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से १३६ बच्चों की मौत की खबर के बाद चमकी का भय अब मुंबई और ठाणे जिले में भी देखा जा रहा है. भय भी क्यों न हो? बिहार सरकार ने चमकी के लिए लीची को जो जिम्मेदार ठहराया है. बयान आते ही मुंबई और ठाणे जिले में भी लीची की बिक्री पर भारी असर देखा जा रहा है. बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर की लीची देश ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित ठाणे, कल्याण, मीरा-भाइंदर, वसई-विरार, पालघर तथा पनवेल-उरण में अप्रैल से लेकर जून तक लीची खूब पसंद की जाती है. हजारों लोग लीची का व्यवसाय करते हैं. मगर जबसे चमकी का कहर शुरू हुआ तब से लीची लगभग बाजार से गायब हो गई है. कहीं-कहीं दिख भी रही है तो कोई खरीददार ही नहीं है. मतलब चमकी का भय इन व्यापारियों को लग गया है. मालूम हो कि मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से १३६ बच्चों की मौत हो गई. इसको लेकर जब पूरे देश में हो-हल्ला मचा तो बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये मौतें लीची के कारण हुई हैं. एक बयान के कारण लीची के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न लग गया. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री का बयान पूरे देश में जंगल की आग की तरह फैल गया. मुंबई में लीची मुख्य रूप से बिहार से आती है. यहां के व्यापारियों ने लीची मंगाना बंद कर दिया. वहां से जो व्यापारी भेजते हैं वह कुछ ही दुकानों तक पहुंचती हैं. लीची किसी दुकान पर है भी तो उसे कोई खरीद नहीं रहा है.
