छोटी-सी उम्र में भ्रष्टाचार का शिकार हो गई कर्णवी

तक्षशिला अग्निकांड में 22 बच्चों ने अपनी जान गवां दी। वहां ट्यूशन क्लास में ट्यूटर का काम करने वाली ग्रीष्मा अपने से 20 साल छोटी कर्णवी को भी अपने साथ ले गई थी। उसे ले जाते समय उसने कर्णवी के पिता से कहा था कि आज क्लास में मेरा आखिरी दिन है, इसलिए कर्णवी को अपने साथ ले जा रही हूं। इस पर पिता ने अपनी सहमति दे दी।
चौथी मंजिल से कूदने वालों में कर्णवी भी थी
सरथाणा टोल नाके के पास तक्षशिला आर्केड बिल्डिंग के चौथे माले से जब विद्यार्थी एक-एक करके कूद रहे थे, तब उसमें से एक ढाई साल की कर्णवी भी इसी आशा से कूद गई कि उसे बचा लिया जाएगा। पर उसकी यह आशा निर्मूल साबित हुई। उसके पहले ग्रीष्मा भी कूद गई थी, वह भी नहीं बच पाई।
फाइन आर्ट्स किया था ग्रीष्मा ने
ग्रीष्मा ने फाइन आर्ट्स किया था, ट्यूशन क्लास में वे ट्यूटर थी। उसकी क्लास शुक्रवार को खत्म हो रही थी। जब वह अपने घर से जाने लगी, तब उसने अपने साथ ढाई साल की कर्णवी को भी ले लिया। इसके लिए उसने उसके पिता से कहा कि आज क्लास में उसका आखिरी दिन है, इसलिए वह कर्णवी को भी अपने साथ लिए जा रही है। तब पिता ने बिना कुछ सोचे-समझे उसे अनुमति दे दी। ग्रीष्मा का आखिरी दिन कर्णवी के लिए भी आखिरी दिन साबित हुआ।
लोगों के हाथ छोटे पड़ गए
जब कर्णवी ने चौथी मंजिल से जम्प किया, तब उसे कैच करने के लिए कई लोगों ने अपने हाथ फैलाए, पर सभी के हाथ छोटे पड़ गए और वह सीधे जमीन पर गिर पड़ी। उस मासूम के मरने की उम्र तो बिलकुल भी न थी। पर वह भ्रष्टाचार का शिकार हो गई।
