जलवायु परिवर्तन पर UN की रिपोर्ट का होगा विश्लेषण, बचाव संबंधी उपायों पर होगी चर्चा

पेरिस: वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्ट का 195 देशों की जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी समिति (आईपीसीसी) के तहत राजनयिकों द्वारा शब्दश: अध्ययन किया जाएगा. ‘नीति निर्माताओं के लिए सार-संक्षेप’ के मसौदा संस्करण में इस बात को रेखांकित किया गया है कि वैश्विक तापमान ने जल्दी इसे काबू में करने के मानव जाति के प्रयासों को पीछे छोड़ दिया है. इसमें जलवायु परिवर्तन के नुकसानों से बचने के लिए जरूरी विकल्पों का भी उल्लेख है. रिपोर्ट में पृथ्वी का औसत सतही तापमान औद्योगिक कालखंड से पहले के समय से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने से रोकने का खाका पेश किया गया है.
आईपीसीसी की यह रिपोर्ट ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के मौजूदा स्तर के मद्देनजर इस बात का अनुमान जताती है कि हम 2040 के आसपास 1.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर लेंगे. 1.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर वाली दुनिया होने की कम से कम 50 प्रतिशत संभावनाएं रखने के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था 2050 तक ऐसी होनी चाहिए कि वातावरण में अतिरिक्त कार्बन डाई ऑक्साइड नहीं जाए.
इस बीच सीओ2 उत्सर्जन 2020 के बाद उस समय के शीर्ष स्तर से आगे नहीं बढ़ना चाहिए और उसके बाद से ग्राफ नीचे की ओर उतरना शुरू हो जाना चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार आज की तारीख तो हम अब भी गलत दिशा में बढ़ रहे हैं. तीन साल तक स्तर स्थिर रहने के बाद 2017 में उत्सर्जन ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ गया. 22 पन्नों की इस रिपोर्ट में मानव जाति के ‘कार्बन बजट’ का भी उल्लेख है. जिसका अर्थ हुआ कि हम कितनी कार्बन डाईऑक्साइड वातावरण में पहुंचाने के बाद भी 1.5 डिग्री सेल्सियस वाली सीमा के अंदर रह सकते हैं. कार्बन डाईऑक्साइड मुख्य ग्रीनहाउस गैस है.
