ज़हरीली हवा बन सकती है टॉन्सिलाइटिस का कारण

भारत के ज़्यादातर शहरों में मौसम बदल गया है और साथ कई इलाकों में अब भी हवा की गुणवत्ता बेहद ख़राब है, जिसकी वजह से ज़्यादातर लोग गले में ख़राश या दर्द की शिकायत करते हैं। आमतौर पर गले में ख़राश या दर्द होने पर लोग खुद से उपाय करते हैं, लेकिन बेहतर यही है कि घरेलू नुस्खे या खुद से कोई दवा लेने की जगह सीधे डॉक्टर से संपर्क किया जाए। खासतौर पर ऐसे वक्त जब कोरोना वायरस संक्रमण का क़हर ख़त्म नहीं हुआ है।

ऐसा इसलिए क्योंकि गले का दर्द कई तरह के इंफेक्शन के साथ टॉन्सिलाइटिस का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। अगर समय रहते इसका इलाज किया जाए, तो दर्द बहुत ज़्यादा बढ़ सकता है और साथ ही बुखार भी सकता है।

टॉन्सिलाइटिस क्या है?

हमारे गले के दोनों तरफ अंग हैं जिन्हें टॉन्सिल्स कहा जाता है। किसी तरह के बैक्टीरिया या इंफेक्शन के संपर्क में आने पर इनमें सूजन जाती है, जिससे कुछ भी खानेपीने के साथ सलाइवा निगलने में भी बेहद दर्द होता है। आमतौर पर इनका रंग हमारी जीभ जैसा यानी गुलाबी रंग का होता है लेकिन इंफेक्शन होने पर यह सुर्ख लाल हो जाते हैं और इन पर सफेद स्पॉट भी दिखाई देने लगते हैं। टॉन्सिलाइटिस होना इस बात का संकेत होता है कि आपका शरीर संक्रमण की चपेट में चुका है।

क्या हैं लक्षण

गले में दर्द और खराश

गले से लेकर कानों तक दर्द होना

निगलने में दिक्कत होना

बुखार आना

आवाज़ प्रभावित होना

गले में दर्द के साथ सिरदर्द होना

टॉन्सिल्स में दर्द होना और गला सूज जाना

छोटे बच्चों में इसके कारण पेट में दर्द जैसे लक्षण भी होते हैं।

गर्दन में दर्द

टॉन्सिलिटिस इंफेक्शन से कैसे बचा जा सकता है?

यह संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है, इसलिए इसमें साफसफाई का ख़ास ध्यान रखने की ज़रूरत होती है।

कुछ खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से धोएं।

छोटे बच्चों में संक्रमण होने पर उन्हें घर से बाहर ले जाएं और घर पर रहकर ही देखभाल करें।

खांसने और छींकने के बाद हाथों को धोना भूलें।

 

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