जियो प्लैटफॉर्म ने भरी रिलायंस की झोली , 5जी और जियोमार्ट कारोबार विस्तार का रास्ता खुला

कोरोना की वैश्विक महासंकट की चुनौती के बीच जियो प्लैटफॉर्म में निवेश का सिलसिला विश्व की सोशल नेटवर्किंग क्षेत्र की अग्रणी फेसबुक के साथ शुरू हुआ और नौ निवेशकों ने 54 दिन की छोटी सी अवधि में 104326.95 करोड़ रुपये का निवेश कर रिलायंस की झोली भर दी है।

कुल मिलाकर जियो प्लैटफॉर्म में नौ निवेशकों ने दस निवेश प्रस्तावों के जरिए 22.38 प्रतिशत इक्विटी के लिए कुल 104326.95 करोड़ रुपये निवेश का ऐलान किया है। इसमें सिल्वर लेक के दो निवेश प्रस्ताव हैं। इतनी राशि के निवेश के बावजूद जियो प्लैटफॉर्म रिलायंस की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई बनी रहेगी।

शनिवार को ही दो निवेशकों ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट फर्म टीपीजी और एल केटरटन ने निवेश की घोषणा की। टीपीजी, जियो प्लेटफॉर्म में 4,546.80 करोड़ रुपये 0.93 प्रतिशत इक्विटी के लिए निवेश करेगी। इसके अलावा एल केटरटन ने 0.39 प्रतिशत के लिये 1894.50 करोड़ के निवेश का ऐलान किया। दोनों कंपनियो का जियो प्लेटफॉर्म में निवेश इक्विटी वैल्यू 4.91 लाख करोड़ रुपये और एंटरप्राइज वैल्यू 5.16 लाख करोड़ रुपये पर हुआ है।

मुकेश अंबानी ने दोनों कंपनियों के निवेश पर खुशी जाहिर की। उन्होंने निवेश करने वाली कंपनियों के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को भी सराहा। अंबानी ने कहा कि जियो प्लैटफॉर्म एक डिजिटल इकोसिस्टम का विकास कर रहा है, जिससे भारतीयों के जीवन को डिजिटली सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

दूरसंचार क्षेत्र में कमाई और ग्राहक आधार के मामले में जियो नंबर एक पर है। इस स्थान पर मजबूती से टिके रहने के लिए कंपनी को 5जी तकनीक में निवेश के लिए मोटी रकम की जरूरत होगी। हाल ही में जियोमार्ट के माध्यम से रिलायंस ने रिटेल में भी कदम रख दिया है। 

रिटेल में आक्रमक कारोबार करने के लिए भी रिलायंस को पैसे की जरूरत पड़ेगी। जियो प्लैटफॉर्म में मौजूदा निवेश ने रिलायंस की चिंता पर विराम लगा दिया है। कंपनी ने राइट्स इश्यू से भी 53,124.20 करोड़ रु जुटा लिए हैं। रिलायंस पर इस वर्ष 31 मार्च को कुल 336394 करोड रुपये का कर्ज था। कंपनी के पास उक्त तिथि तक 175259 करोड़ रुपये नकदी भी थी। इस प्रकार शुद्ध ऋण 161035 करोड़ रुपये है। कंपनी की मार्च 2०21 तक कर्जमुक्त होने की योजना है किंतु कंपनी में निवेश के लिए, जिस तरह से विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां लालायित हैं, यह लक्ष्य रिलायंस इससे पहले ही आसानी से हासिल कर सकती है।

कंपनी तीन दशकों में पहली बार राइट्स इश्यू लाई और इससे 53124.20 करोड़ रुपये जुटायेगी। पिछले दस वर्ष में किसी गैर वित्तीय संस्थान का यह सबसे बड़ा इश्यू था और इसे 1.59 प्रतिशत अधिक अभिदान मिला। इश्यू के तहत दस रुपये मूल्य का शेयर 1247 रुपये प्रीमियम के साथ 1257 रुपये पर दिया जायेगा। इश्यू की राशि तीन किश्तों में अगले वर्ष नवंबर तक अदा करनी है। इश्यू सोमवार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना है। एक रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस ने 2०19 तक के पांच सालों में कुल 5.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया और इसमें से साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये केवल रिलायंस जियो में निवेश हुआ।

आरआईएल की जियो प्लैटफॉर्म में सबसे पहले 22 अप्रैल को फेसबुक ने 43,573.62 करोड़ रुपये में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की । इसके बाद सिल्वर लेक ने तीन मई को 5,655.75 करोड़ रुपये में 1.15 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया।जियो प्लैटफॉर्म में आठ मई को विस्टा ने 11,367 करोड़ रुपये में 2.32 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की । इसके बाद जनरल अटलांटिक ने 17 मई को 6,598.38 करोड़ रुपये में 1.34 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की। इसके बाद केकेआर ने 22 मई को 11,367 करोड़ रुपये में 2.32 फीसद हिस्सेदारी खरीदने की ऐलान किया।

पांच जून को मुबाडला ने 9,093.60 करोड़ रुपये में 1.85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की। इसी दिन सिल्वर लेक ने एक बार फिर 4,546.8० करोड़ रुपये में अतिरिक्त ०.93 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया। इसके बाद अबुधाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने 5,683.5० करोड़ रुपये में 1.16 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी। अब 13 जून यानी शनिवार को टीपीजी ने जियो प्लेटफॉर्म में 4,546.8 करोड़ रुपये में ०.93 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की है। शनिवार को एल केटरटन ने जियो प्लैटफॉर्म में 1,894.5० करोड़ रुपये में ०.39 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया।
 

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