डॉक्टरों ने बताए ये रामबाण उपाय, एहतियात बरतेंगे तो पास नहीं आएगा चमकी वायरस

उत्तराखंड में चमकी बुखार के वायरस की कोई खबर नहीं है। लेकिन, संभावना को लेकर एहतियात बरतने की सख्त जरूरत है।डॉक्टरों के मुताबिक यदि एहतियात बरती जाए तो इस खतरनाक बुखार का वायरस पास नहीं फटक सकता। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस बीमारी का कारण क्या है तो बचाव विशेष के बारे में भी चिकित्सक खास जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।

खास एहतियात बरतने को कहा

संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के उत्तराखंड नोडल अधिकारी डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि एक्यूट इनसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) बीमारियों का एक समूह का नाम है। इन्हीं में से एक वायरस इस बुखार का भी माना जा रहा है। इसे बिहार की क्षेत्रीय भाषा में चमकी बुखार का नाम दिया गया है।

उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले ऊधमसिंह नगर में जापानी इनसेफ्लाइटिस (जेई) यानी जापानी बुखार के मामले सामने आए थे। उसके बाद से प्रदेश में इस तरह के मामले नहीं आए हैं। लिहाजा, ऊधमसिंह नगर में खास एहतियात बरतने को कहा गया है। डॉ. सिंह ने बताया कि यदि खान-पान और रहन-सहन में साफ-सफाई बरती जाए, स्वच्छ जलापूर्ति हो तो इस तरह का कोई वायरस पैदा नहीं हो सकता है। 

क्या हैं लक्षण 

चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज बुखार रहता है। बदन में ऐंठन होती है। बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं। कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है। इससे उसे झटके लगने लगते हैं। इसकी वजह से सेंट्रल नर्वस सिस्टम खराब हो जाता है। 

क्या करें

बुखार आने पर बच्चे को दाएं या बाएं तरफ लेटाकर अस्पताल ले जाएं। 
बच्चे को बेहोशी की हालत में छायादार स्थान पर लेटाकर रखें। 
बुखार आने पर बच्चे के शरीर से कपड़े उतारकर उसे हल्के कपड़े पहनाएं। 
 

क्या न करें

बच्चे को कंबल से न ढकें या गर्म कपड़े न पहनाएं। 
बेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में कुछ न डालें। 
मरीज के बिस्तर पर न बैठें और न उसे बेवजह तंग करें। 
मरीज के पास बैठकर शोर न मचाएं।

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