तूतीकोरिन में फिर भड़की हिंसा, 3 लोगों को लगी गोली, 1 मौत, इंटरनेट पर रोक

तूतीकोरिन, तमिलनाडु, तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट को बंद करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है. अन्ना नगर इलाके में फिर हिंसा भड़क गई है, जिसमें तीन लोगों को गोलियां लगी हैं. इनमें से एक की मौत हो गई है.


हालांकि, प्रशासन ने घटनास्थल पर  धारा 144 लगा रखी है, जबकि पड़ोसी जिलों से 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए भेजे गए हैं. बावजूद इसके बुधवार दोपहर फिर हिंसा भड़क उठी.

दूसरी ओर पुलिस फायरिंग का ये मसला राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है. वाइको ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की है, तो कमल हासन भी पीड़ितों से मिलने तूतीकोरिन पहुंचे हैं.


हालांकि अब भी पुलिस फायरिंग में मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है. बता दें कि पुलिस फायरिंग में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिसमें 9 की हालत बेहद गंभीर है.


प्रशासन ने बुधवार को भी सार्वजनिक यातायात के संचालन की अनुमति नहीं दी है. दूसरी ओर ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल का आह्वान किया है.

सैकड़ों लोगों ने कथित रूप से डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट पर किया हमला


वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट को बंद करने की मांग को लेकर मंगलवार को आस-पास के क्षेत्रों के सैकड़ों लोगों ने कथित रूप से डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट पर हमला कर दिया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पहले आंसू गैस के गोले छोड़े. प्रदर्शनकारी नहीं रुके, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इसके बाद भी हिंसा जारी रहने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी.



बीते 100 दिनों से चल रहा था विरोध प्रदर्शन


कंपनी ने यहां चार लाख टन प्रति वर्ष स्टरलाइट कॉपर परियोजना के विस्तार की घोषणा की थी, जिसके खिलाफ यहां लोग बीते 100 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं जो मंगलवार को हिंसक हो गया. लोगों में इस परियोजना से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है.


प्रदर्शनकारियों ने उग्र रूप धारण करते हुए कई वाहनों में आग लगा दिया और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया. कलेक्ट्रेट के आस-पास का क्षेत्र युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया. काला धुआं उठते हुए देखा गया, पुलिस ने जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया.



तमिलनाडु के CM बोले- कंपनी के खिलाफ होगी कार्रवाई


विपक्षी पार्टियों ने इन मौतों के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. एक पार्टी ने मुख्यमंत्री पलनीस्वामी के इस्तीफे की मांग की है. मुख्यमंत्री ई. पलनीस्वामी ने घटना के बाद मंत्रिमंडल के अपने सहयोगियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की है और कहा कि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.


राज्य सरकार ने अपने बयान में कहा, "इस मामले में सरकार लोगों की इच्छाओं का सम्मान करती है. करीब 20,000 लोगों ने कंपनी के खिलाफ रैली निकाली और लोगों ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट के कार्यालय में तोड़-फोड़ के दौरान पुलिस पर हमला कर दिया और पुलिस वाहनों को जला दिया. पुलिस इसे नियंत्रित नहीं कर सकी, इसलिए उसे कुछ कार्रवाई करनी पड़ी."


सरकार ने कहा है कि वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेगी. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आस-पास के जिलों से पुलिस को भेजा गया है.



'स्थिति को नियंत्रित करने के लिए करनी पड़ी फायरिंग'


घटनास्थल पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, "प्रदर्शनकारियों ने जब क्षेत्र में कुछ वाहनों को जला दिया, उसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया और आंसूगैस के गोले छोड़े गए, लेकिन जब उनपर इनका असर नहीं हुआ तो पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग करनी पड़ी."


प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने बिना उकसावे के ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल का प्रयोग किया.


यहां के लोग स्टरलाइट कॉपर स्मेलटिंग प्लांट को बंद करने की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि इस प्लांट की वजह से वायु प्रदूषण हो रहा है. स्थानीय लोग कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं और भूगर्भ जल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है.


रजनीकांत और कमल हासन ने भी की घटना की निंदा


घटना की निंदा करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के कार्यकारी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने कहा कि पुलिस ने अत्याचार किया है.


अभिनेता से नेता बने कमल हासन और रजनीकांत ने भी इस घटना की निंदा की है.


मक्काल नीति मय्याम के प्रमुख कमल हासन ने कहा, "(स्टरलाइट कॉपर के) विस्तार की इजाजत ही नहीं दी जानी चाहिए थी. अगर संभव है तो इस इकाई को बंद करना ही अच्छा होगा. आवासीय और कृषि क्षेत्र के समीप प्लांट लगाने का कोई औचित्य नहीं है."


रजनीकांत ने कहा, "यह समझ नहीं आ रहा है कि सरकार जिसने इस प्लांट की अनुमति दी थी, वह क्यों कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और क्यों केवल मूकदर्शक बनी हुई है."


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