तेरा मेरा साथ रहे शीषर्क से सजी कमाल की महफ़िल
इन्दौर । बीती शाम कई मायनों में याद किए जाने की लायक़ थी। जहां एक तरफ पूरी दुनिया इस दिन को गांधी जयंती के रूप में मना रही थी,वहीं शहर की दो संस्थाएं "कॉम्बेट अगेंस्ट थैलेसीमिया" और "सुरीली उड़ान" ने मिलकर संगीत के माध्यम से थैलेसीमिया जैसी घातक बीमारी से जागरूक किया। आयोजक वर्षा वाघ और राम मेघानी ने शुरुआत में कार्यक्रम का उद्देश्य बताया और कलाकारों का स्वागत किया। "तेरा मेरा साथ रहे" कार्यक्रम फेसबुक और यूट्यूब पर पेश किया गया। दीप प्रज्वलन से महफ़िल की शुरुआत हुई। फिर जज़्बात व एहसासात से लबरेज़ शाम का हर लम्हा यादगार बन गया। फनकार सरला मेघानी, मनीष शुक्ला, नुपुर कौशल, रोहित ओझा, हेमा मछाय और करिश्मा तोन्डे ने एक से बढ़कर एक नग़मे सुनाए। इनको सुनना ख़ास तो था ही सही, इन्होंने बता दिया कि हर कलाकार के अंदर कई किस्म के लोग सांस लेते हैं और ऐसा ही मंज़र इस महफ़िल में देखने को मिला। जब उन्होंने इश्क मोहब्बत के नग़मों के साथ थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के दर्द की शिद्दत को लफ़्ज़ों में बांधना चाहा तब माहौल भावुक हो उठा। हज़ारों संगीत के क़द्रदानों ने इस प्रोग्राम को देखा और बेशुमार कमेंट्स और लाइक्स से कलाकारों की नेक सोच को सराहा। महफ़िल में फ़नकारों ने लता की आवाज़ में टाइटल सांग "तेरा मेरा साथ रहे" सुनाया जिसे ख़ूब पसन्द किया गया। आशा भोंसले की आवाज़ में गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी का नग़मा सभी के दिल को छू गया। जिसके बोल थे- "आँखों से जो उतरी है दिल में तस्वीर है एक अन्जाने की/ खुद ढूँढ रही है शमां जिसे क्या बात है उस परवाने की।"
मोहम्मद रफी ने सबसे ज्यादा डुएट गाने 'आशा भोसले' के साथ गाए हैं। मोहम्मद रफी के इन गानों का जादू आज भी बरकरार है। सरला मेघानी और मनीष शुक्ला ने "अच्छा जी मैं हारी,चलो मान जाओ ना" गाने को अपनी करिश्माई आवाज से सुनाकर संगीत प्रेमियों को मानो मदहोश कर दिया। शहर के कलाकारों ने फ़िल्म महल का गाना "ये दुनिया वाले पूछेंगे मुलाक़ात हुई क्या बात हुई" किशोर कुमार और आशा भोंसले की आवाज़ में सुनाकर उम्दा गायिकी से रूबरू करवाया। इस सुरीली महफ़िल का संचालन मोना ठाकुर ने किया। संगीत दीपेश जैन, हेमेंद्र महावर और अमित शर्मा ने दिया। संस्था सुरीली उड़ान के अध्यक्ष राम मेघानी ने सभी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा संगीत की उम्दा दावत का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
