दुखद: अंतरराष्ट्रीय बांसुरीवादक कांशी नाथ नहीं रहे

हरियाणा में सिरसा जिले के झोरडऩाली गांव के जोगी परिवार में जन्में अंतर राष्ट्रीय बांसुरीवादक बाबा कांशी नाथ का आज  निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उनके निधन पर

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ट्वीट कर अपनी सवेंदनाएं प्रकट की है। बाबा कांशी नाथ के अंतिम दर्शन के लिए संगीत की दुनिया से सरोकार रखने वाले लोग पहुंचे और अपने श्रद्धासुमन

अर्पित किए।



बाबा कांशी नाथ देश की सीमा के पार विदेशों में अति विशिष्ट लोगों के मंचों की अपनी बांसुरी की धुन से शोभा बढ़ाते थे। हरियाणा में भी राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में अकसर उनकी

उपस्थिति देखने को मिलती थी। बांसुरी की धुन ने उन्हें देश -विदेश से अनेक अवार्ड दिलवाए। बेशक बाबा ठेठ अनपढ़ थे लेकिन उनके घर में एक खुंटी पर बैग में टंगी बांसुरी हर

किसी को अपनी ओर आकृष्ठ कर रही थी। बांसुरी की कला के दम पर वह स्वयं की पहचान देश-विदेश में कायम करने सफल रहे । वे आजीवन झोपड़ी में रहे । यह बात दीगर है कि

मंचों पर उनकी धुन में मशगूल नेता तथा व अधिकारी अकसर मकान खड़ा कर देने की बातें करते थे। पिछले वर्ष डेरा सच्चा सौदा ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहिम के जन्मोत्सव पर

आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में कांशी नाथ की बांसुरी की धुन से चार चांद लगाए थे। डेरा प्रमुख ने उन्हें डेरा की ओर से घर बनाकर देने को ऐलान भी किया लेकिन वह सिरे नहीं चढ़

पाया।



उनके पैतृक गांव के अलावा पाकिस्तान व प्रदेशभर के विभिन्न स्थलों से आए उनके चाहवानों की जुबां से सिवाय बांसुरी की धुन पर हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर देने की बात

ही सुनने को मिल रही थी। उनके बड़े बेटे महेंद्र सिंह ने बताया कि बाबा कांशी नाथ पिछले कुछ दिनों से बीमार पड़ गए थे। उनका उपचार चल रहा था कि आज अचानक उन्होंने घर

पर ही प्राण त्याग दिए। उपचार के दौरान उन्होंने अपनी बांसरुी की धुन को आगे बढ़ाते रहने का हुक्म अवश्य बड़े बेटे को दिया।



महेंद्र सिंह को मलाल था कि अकसर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित होने वाले बड़े समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए कांशी नाथ को बुलाया जाता था लेकिन प्रशासन आज उनकी मौत

पर उन्हें भूल गया। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में सामाजिक रस्मों रिवाज से कर दिया गया। उनकी अंतिम यात्रा के सैंकडों लोग गवाह बने।  


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