दूसरों की सुरक्षा करने वाली पुलिस भी नहीं सुरक्षित, दोनाली लेकर थाने में घुसा शख्स, मुंशी को मार डाला

लोगों को सुरक्षा देने का दावा करने वाली पुलिस रविवार को अपनी ही सुरक्षा को लेकर सकते में आ गई, जिसका परिणाम यह हुआ कि एक हथियारबंद व्यक्ति थाने में आया और आते ही थाने के मुंशी को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया। हालांकि जानकारी अनुसार हथियारबंद व्यक्ति ने इस हमले में दो फायर किए लेकिन एक का निशाना चूक गया। यदि वह भी निशाना सही लगा होता तो शायद मृतकों का आंकड़ा दो होता। पर गनीमत यह रही कि ऐसा नहीं हुआ। चाहे इस हमले के बाद उक्त व्यक्ति को थाने के संतरी ने दलेरी के साथ काबू कर लिया लेकिन फिर भी संतरी की लापरवाही के कारण एक मुलाजिम का जान चली गई। मरने वाले की पहचान हेड कांस्टेबल अमरजीत सिंह के रुप में हुई है। जिसकी प्रमोशन ड्यू थी और वह चंद दिनों में एएसआई बनने वाला था। परिवार में खुशी का माहौल था कि जल्दी ही अमरजीत सिंह एएसआई बन जाएगा पर किसे पता था कि रविवार का दिन उसकी ड्यूटी का आखिरी दिन होगा।
12 बजे आया था फोन बोले आज फोन क्यों नहीं किया
पति की मौत की खबर सुनकर रोती बिलखती आईवीवाई अस्पताल में पहुंची हेड कांस्टेबल अमरजीत ङ्क्षसह की पत्नी अमरजीत कौर ने बताया कि इनके ड्यूटी जाने के बाद मैं अकसर उन्हें फोन करती थी व पूछती थी कि क्या वह ठीक ठाक पहुंच गए हैं, क्या कर रहे हैं वापिस कब आना है। पर आज रविवार था घर में काम अधिक था फोन नहीं किया तो अमरजीत ने ही करीब 12 बजे उसे फोन किया था और एक उलाहना देते हुए कहा कि क्या बात है आज फोन नहीं किया तो उसने आगे से यह कह कर जल्दी बात कर फोन काट दिया था कि सुबह से काम में फंसी हुई हूं। आज काम जरा ज्यादा है रविवार था इसलिए कई अन्य काम भी करने थे और उसने इतना कहकर फोन काट दिया कि वह काम निपटा कर फोन करती है। परंतु उसे क्या पता था कि यह अमरजीत का उसके लिए आखिर फोन था। यह कहकर अमरजीत बिलख कर रो पड़ी और कुरलाती हुई बोली कि उसका तो संसार ही खत्म हो गया। सुबह किसको वह चाव से ड्यूटी के लिए तैयार करेगी किसने लिए नाश्ता तैयार करेगी। अब कौन लेकर जाएगा खाने का टिफ्न।
बाबू जी हुण मेरी प्रमोशन का नंबर भी आ जाना, तुहाड़े मुंडे दे वी मोडे ते स्टॉर लग जाना हूण
अस्पताल में अपनी बहु के साथ पहुंचे हेड कांस्टेबल अमरजीत के पिता हरदेव सिंह अंदर ही अंदर गुमसुम एक तरफ हाथ में पानी का गिलास थामे खड़े थे। बेटे की मौत पर बहु व पौते का रोना वह जैसे तैसे सहन कर रहे थे। मन में घुटन थी जैसे किसी ने सबकुछ छीन लिया हो। पर रोएं भी तो कैसे खुद रोएंगे तो पौते व बहु को कौन संभालेगा। कुछ देर तो वह ऐसे ही गुमसुम खड़े अमरजीत के साथी मुलाजिमों के साथ भरे दिल से बातें करते रहे। पर रहा नहीं गया, इस दौरान मौके पर खड़े एएसआई हरमेश कुमार को देख एकाएक ईशारा किया और बिलख पड़े। बोले मेरा मुंडा बहुत खुश दिल सी। गली के बच्चियां नाल भी लंगदे वड़दे मकाज करदा सी। कुछ दिन पहले मैंने पूछा था कि साथ वाले एएसआई बन गए तेरा नंबर कब आएगा तो अमरजीत ने हंस कर जवाब दिया था कि बाबू जी हुण तुस्सी चिंता न करो मेरी प्रमोशन दा नंबर भी आउण वाला है, तुहाड़े मुंडे दे वी मोडे से हुण स्टॉर लग जाना, बस तुस्सी वेखी जाओ। इतना कहकर हरदेव सिंह से रहा नहीं गया और वह फूट फूट कर रो पड़ा। हरदेव सिंह ने बताया कि वह बहुत अभागा है, इससे पहले भी अमरजीत के भाई की मौत हो गई थी अब अमरजीत की मौत हो गई वह टूट चुका है। अपना दुख बताए भी तो किसे। रब्बा इस दी जगह मैनूं लै जादां तां…।
पुलिस की सुरक्षा में चूक
थाने की सुरक्षा की चूक से ही सुरिंदर सिंह अपनी दोनाली बंदूक लोडेड करके थाने के अंदर चला गया। सवाल यह उठता है कि अगर उसने अपनी बंदूक जमा करवाने की बात कह रहा था तो उसे पहले चेक क्यों नहीं किया कि बंदूक खाली है या फिर लोडेड। अगर गेट पर ही बंदूक को चेक कर लिया गया होता तो शायद सुरिंदर सिंह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होता।
