देश में कोरोना विस्फोट, महामारी की दूसरी लहर में इतनी खराब कैसे हो गई स्थिति?

नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की रफ्तार और तेज हो गई है. देश में पिछले 24 घंटे में महामारी के 3.14 लाख केस सामने आए हैं. जो दुनिया में एक दिन में किसी एक देश में आए ये सबसे अधिक नए केस हैं. इस दौरान 2,102 मरीजो की मौत भी हो गई है.संक्रमण के इस तूफान ने देश के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में कहा है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश को किसी तूफान की तरह प्रभावित किया है. देश में 4 अप्रैल को कोविड के लगभग एक लाख नए केस सामने आए थे. इसके ठीक 17वें दिन यानी बुधवार को महामारी के 3 लाख से ज्यादा नए केस सामने आए. इस अवधि के दौरान कोरोना के मामलों में 6.76% रोजाना की वृद्धि हुई है. अगर अमेरिका के रोजाना केस से इस वृद्धि की तुलना की जाए तो यह उससे चार गुना अधिक तेज है.
कैसे इतने ज्यादा बिगड़ गए हालात?
बता दें कि पिछले साल सितंबर महीने में संक्रमण के मामले अपने चरम पर थे. उसके बाद कोरोना के मामलों में लगातार गिरावट आने लगी जो लगभग 30 हफ्तों पर जारी रही. इसके बाद इस साल फरवरी के मध्य से फिर कोरोना के मामले बढ़ने लगे.विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि लोगों की लापरवाही के कारण दोबारा महामारी के मामले बढ़े. लोगों को लगा कि संक्रमण दोबारा वापसी नहीं करेगा. विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि भारत अपने हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और आक्रामक रूप से टीकाकरण के अवसर को भुनाने में विफल रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में बॉयोस्टैटिस्टिक्स और महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी ने एपी से बातचीत में बताया, 'हम सफलता के बहुत करीब थे'.ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर निकोलाई पेत्रोव्स्की ने कहा कि लोगों ने सोचना शुरू कर दिया कि वे महामारी से बच गए हैं. खासतौर पर तब जब इस देश ने महामारी की पहली लहर के दौरान इतनी मेहनत नहीं की थी, जितनी हर कोई कर रहा था. उन्होंने कहा, 'अब, निश्चित रूप से, हम एक बड़ी समस्या से घिर गए हैं और यह बात जानते हैं कि यह विनाशकारी साबित हो सकती है.' उन्होंने कहा कि देश में सभी सर्वोत्तम संसाधनों का उपयोग करके भी रातोंरात 1.2 बिलियन टीकाकरण नहीं किया जा सकता.केरल स्थित राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंस के प्रोफेसर रिजो एम जॉन ने कोरोना के बढ़ते केस के लिए राजनेताओं के गैरजिम्मेदाराना बयान को भी जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर के केस कम होने लगे और वह अपने निचले स्तर पर पहुंच गए. तब कुछ नेताओं के बयानों ने लोगों को गुमराह किया. उन्हें यह एहसास कराया कि वह इस खतरे से बाहर हैं. उन्हें यह बताया गया कि भारत ने कोविड को हरा दिया था, जिसके बाद लोग लापरवाह होने लगे.
