देश में लोगों के बीच आर्थिक ही नहीं, कद की खाई में भी हुआ इजाफा

नई दिल्ली। हाल के वर्षों में भारतीयों की औसत लंबाई घटी है। इस ट्रेंड में जो सबसे ज्यादा चिंता वाली बात है, वह है इसका आर्थिक और सामाजिक पहलू। यानी अमीरों की औसत लंबाई में कोई खास फर्क नहीं दिख रहा लेकिन गरीबों की औसत लंबाई घट रही है। इसी तरह सामाजिक पृष्ठभूमि का अंतर भी साफ दिख रहा है। एक 5 साल की एसटी बच्ची की औसत लंबाई जनरल कास्ट की हमउम्र बच्ची से 2 सेंटीमीटर कम है। दरअसल, ओपन एक्सेस साइंस जर्नल प्लोस वन की स्टडी से इस ट्रेंड का पता चला है। प्लोस वन ने 1998-99, 2005-06 और 2015-16 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आधार पर वयस्क महिलाओं और पुरुषों की औसत ऊंचाई की तुलना करते हुए स्टडी की है।
अगर 2005-06 और 2015-16 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो साफ दिख रहा है कि सबसे गरीब तबके के लोगों की औसत लंबाई सबसे ज्यादा घटी है। 15-25 एज ग्रुप की महिलाओं की बात करें तो इस दौरान सबसे ज्यादा गरीब महिलाओं की औसत लंबाई 150.37 सेंटीमीटर से घटकर 149.74 सेंटीमीटर हो गई यानी औसत कद 0.63 सेंटीमीटर घट गई। गरीब तबके की महिलाओं की औसत लंबाई 0.05 सेंटीमीटर बढ़ी। मिडल क्लास की महिलाओं का कद 0.17 सेमी बढ़ा। अमीर महिलाओं की औसत लंबाई 0.23 सेमी बढ़ी। सबसे अमीर वर्ग की महिलाओं का कद 0.06 सेंटीमीटर घटा। 25-50 एज ग्रुप की महिलाओं की औसत लंबाई में भी यही ट्रेंड रहा। सबसे गरीब तबके की महिलाओं की औसत लंबाई 0.56 सेंटीमीटर घटी। इस एज ग्रुप में गरीब, मिडल, अमीर और सबसे अमीर तबके की महिलाओं की औसत लंबाई में मामूली से ठीकठाक बढ़ोतरी हुई। सबसे ज्यादा औसत लंबाई सबसे अमीर तबके की महिलाओं की बढ़ी। आंकड़ों को देखने से साफ पता चलता है कि जिनकी आर्थिक और सामाजिक हैसियत अच्छी है, उनकी औसत लंबाई आर्थिक-सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के मुकाबले ज्यादा है। एसटी और सबसे गरीब तबके के लोगों की औसत लंबाई में सबसे ज्यादा गिरावट की वजह पौष्टिक भोजन की कमी और कुपोषण है। आज भी इस तबके के लिए दो वक्त की रोटी बड़ी चुनौती है।
