दौसा के पूर्व SP IPS मनीष अग्रवाल ने दलालों को सौंप दिया था पूरा सिस्टम, जमकर मचाई लूट-ACB

जयपुर. घूसखोरी के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti-Corruption Bureau) के शिकंजे में फंसे दौसा के पूर्व पुलिस अधीक्षक आईपीएस मनीष अग्रवाल (IPS Manish Agarwal) के भ्रष्टाचार का पूरा नेटवर्क दलालों (Brokers) के हाथ में था. दौसा जिले में पुलिस अधीक्षक रहते हुये अग्रवाल ने कानून व्यवस्था की पूरी कमान दलालों के हाथ में सौंप दी थी. उनके इसी भ्रष्टाचार ने जिले की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट कर दी. पूरे इलाके में विकास कार्य दलाली के कारण ठप हो गये. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं.
भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मनीष अग्रवाल को खाकी भले ही कानून व्यवस्था की पालना के लिए पहनी थी लेकिन दौसा में पुलिस अधीक्षक के पद पर रहते हुये उन्होंने अपने सभी अधिकारों को पूरी तरह से दलालों के हाथों में सौंप दिया था. ये हम नहीं कह रहे बल्कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर उनके काले कारनामों का खुलासा कर रही है.
भ्रष्टाचार की गाथा दिल्ली-वडोदरा 8 लेन एक्सप्रेस-वे से जुड़ी हुई है
IPS मनीष अग्रवाल की भ्रष्टाचार की गाथा दिल्ली-वडोदरा 8 लेन एक्सप्रेस-वे से जुड़ी हुई है. इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से जहां केन्द्र एवं राज्य सरकार विकास के सपने सजां रही थी, वहीं आईपीएस मनीष अग्रवाल ने 1800 करोड़ रुपये की इस एक्सप्रेस-वे निर्माण को काली कमाई का गोरखधंधा बना लिया था।. दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेस-वे का निर्माण हरियाणा की के.सी.सी. बिल्डकॉन कंपनी कर रही है. इस कंपनी के राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में कुल 110 वाहन चल रहे हैं.
प्रति वाहन प्रति महीना मासिक बंधी लेते थे एसपी
कंपनी के प्रतिनिधि परिवादी इकबाल सिंह ने एसीबी को बताया कि दौसा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मनीष अग्रवाल द्वारा कंपनी से मासिक बंधी ली जाती है. ये मासिक बंधी विकास कार्यों में लगे हुए पूरे 100 वाहनों पर ली जाती है. आईपीएस मनीष अग्रवाल चार हजार रुपए प्रति वाहन प्रति महीना मासिक बंधी ले रहा है. यही नहीं इस कंपनी के खिलाफ 385/20 मुकदमे को रफा दफा करने की एवज में भी 10 लाख रुपए की घूस आईपीएस मनीष अग्रवाल ने मांगी है.
बंधी देने में आना-कानी करने पर कंपनी को वर्दी का रौब दिखाया
तत्कालीन दौसा पुलिस अधीक्षक मनीष अग्रवाल ने मासिक बंधी देने में आना-कानी करने पर कंपनी को वर्दी का रौब दिखाया. सड़क निर्माण कार्य में लगे उनके वाहनों के खिलाफ अचानक धरपकड़ अभियान शुरू कर दिया. के.सी.सी. कंपनी पर मंथली वसूली का दवाब बनाने के लिए एक्सप्रेस-वे निर्माण में लगे हुए वाहनों के भारी-भरकम चालान काटना शुरू करवा दिया.
