नवजोत सिंह सिद्धू ने क्यों छोड़ी पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कुर्सी

नई दिल्ली. नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ दिया. इस बाबत उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र भी लिखा है. सिद्धू द्वारा यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जबकि करीब दस-बारह दिन पहले ही कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश की कमान सौंपी गई है.
सिद्धू ने अचानक पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा क्यों दिया, इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक सिद्धू नाराज चल रहे थे क्योंकि 18 सूत्री कार्यक्रमों पर काम नहीं हो रहा है. वैसे कहा ये जा रहा है कि सिद्धू कुछ मंत्रियों को पद दिए जाने से नाराज थे. साथ ही पंजाब के एडवोकेट जनरल पद पर की गई नियुक्ति को लेकर भी वे खासे खफा थे. सूत्रों ने बताया कि बेअदबी मामले में खास तौर से सिद्धू को लगता था कि इन दोनों नियुक्तियों से ढिलाई आ जाएगी. हालांकि इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
 पंजाब के नवनियुक्त एडवोकेट जनरल एपीएस देओल की नियुक्ति को लेकर सिद्धू खुश नहीं थे. देओल (एपीएस देओल) ने सोमवार शाम ही राज्य के नए एजी का पदभार संभाला है. दरअसल, जिन्हें एडवोकेट जनरल बनाया गया है वो कैप्टन के लिए किसी एक मामले में अपीयर होते रहे हैं. पूर्व डीजीपी सुमेर सिंह सैनी की ओर से कानूनी लड़ाई भी यही लड़ रहे थे. सैनी अकाली नेताओं के भी नजदीकी माने जाते हैं. डीजी इकबाल प्रीत सिंह सहोता को नियुक्त किए जाने से भी सिद्धू नाराज चल रहे थे.

आइए, पंजाब के 5 बड़े सियासी घटनाक्रमों के बारे में जानते हैं:

1. अमरिंदर का दिल्ली दौरा: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली के दो दिवसीय दौरे की शुरुआत करने वाले हैं। ऐसी अटकलें हैं कि कांग्रेस के दिग्गज नेता भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व से भी मिल सकते हैं। हालांकि, उनके मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने कहा है कि उनकी दिल्ली यात्रा के बारे में बहुत कुछ कहा जा रहा है। घटनाक्रम से परिचित एक भाजपा पदाधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ एक बैठक हो सकती है। 

2. सिद्धू का इस्तीफा: नवजोत सिंह सिद्धू, जो पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्य विरोधियों में से थे और जिन्हें पंजाब पार्टी प्रमुख के रूप में भी नियुक्त किया गया था, ने नियुक्ति के दो महीने बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। घटनाक्रम से परिचित लोगों ने एचटी को बताया कि सिद्धू नाखुश थे क्योंकि उन्हें पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया था। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा और कहा कि वह 'पंजाब के भविष्य और कल्याण से समझौता नहीं कर सकते'।

3. राणा गुरजीत सिंह की वापसी: राणा गुरजीत सिंह की पंजाब कैबिनेट में वापसी से भी सिद्धू भी निराश थे। कपूरथला के विधायक गुरजीत सिंह राणा को कैबिनेट में शामिल करने को लेकर कुछ विवाद था क्योंकि कई कांग्रेस नेताओं ने आलाकमान को पत्र लिखकर उन्हें कैबिनेट में शामिल नहीं करने के लिए कहा था। राणा गुरजीत सिंह कपूरथला का प्रतिनिधित्व करते हैं और अमरिंदर सरकार में मंत्री थे, लेकिन 2018 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

4. विभागों का बंटवारा: पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मंगलवार को अपने नए शामिल किए गए मंत्रियों को विभाग सौंपे। अमरिंदर और सिद्धू के कदमों से कुछ घंटे पहले उन्होंने इस लंबित काम को खत्म किया।

5. अमरिंदर बनाम सिद्धू: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट में दिल्ली रवाना होने से पहले अपने आलोचक पर निशाना साधा। सिद्धू के अपने पद से इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख की 'अस्थिर' प्रकृति के बारे में उन्होंने पहले ही कहा था। कैप्टन ने अपनी दिल्ली यात्रा शुरू करने से पहले एक ट्वीट में कहा, "मैंने पहले ही ऐसा कहा था… वह एक स्थिर व्यक्ति नहीं है और सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए फिट नहीं है।"

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