परिवार चलाने के लिए एक बेटी अपनी जान की बाजी लगा रही है…..

परिवार चलाने के लिए एक बेटी अपनी जान की बाजी लगा रही है….लेकिन न तो जमाने को कोई फर्क पड़ता है…और न ही सिस्टम पर इसका कोई असर होता है ….लोग वाह वाह करते हैं…चंद सिक्के खनकते हैं…और फिर शुरु हो जाती है जिंदगी की जद्दो जहद….
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं….भीड़ है कयामत की ओर हम अकेले हैं…..टेपरिकार्ड पर चल रहा यह फिल्मी गाना….
सिर पर कलश घुटनों के नीचे  फंसी थाली और पैरों की उंगलियों के सहारे पतली रस्सी पर चलकर अपने शरीर के साथ साथ अपनी जिंदगी और परिवार के दायित्वों का संतुलन बनाती छत्तीसगढ़ राज्य की 10 वर्षीय नीता रायसेन जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सिलवानी में अपनी कला का प्रदर्शन कर दो समय की रोटी का बंदोवस्त करती है। लोग करतब देखकर तालियां बजाते हैं, खुश होते हैं, दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं, लेकिन इस मासूम की आंखों में पलने बाले सपनों को बड़े होने से पहले ही दफन होते कोई नही देख पाता……..इसे सिस्टम की विफलता कहें या शासन प्रशासन समाजसेवी और नेताओं की संवेदनहीनता…जिनकी नाक के नीचे इस मासूम का बचपन खेलने खाने के दिनों को देखने से पहले ही जबान और समझदार हो गया है….. रायसेन जिले में इन दिनों छत्तीसगढ़ की एक 10 वर्ष की बालिका पढ़ने लिखने की उम्र में अपने परिवार का पेट पालने की खातिर जान जोखिम मे डाल कर रस्सी पर करतब दिखाती है। 10 साल की बालिका नीता नट को आम जनता समाजसेवी नेता और प्रशासन की नाक के नीचे सड़क चलते लोग रुककर इसके खेल को देखते तो हैं लेकिन सार्थक मदद की तरफ कोई हाथ बढ़ाने की नही सोचता। क्या केंद्र और राज्य सरकारों के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे बेमानी है और सिर्फ कागजों पर ही हैं… महिला बाल विकास की योजनाएं इन मासूमों तक क्यों नही पहुंच पाती हैं….यह एक बड़ा प्रश्न है और उनके कामकाज पर प्रश्नचिन्ह भी है….मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारों पर…….
रायसेन जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सिलवानी में पिछले एक माह से 10 साल की यह मासूम लड़की नीता नट पापी पेट के खातिर रस्सी पर चल कर विभिन्न करतब दिखाती हुई अंत में पेट की भूख को शांत करने के लिए हाथ फैला कर लोगों से सहयोग राशि मांगती है। कुछ लोग तरस खाकर तो कुछ लोग बालिका के दिखाए करतब पर खुश होकर उसे समर्थ अनुसार राशि देते है। मूलतः बिलासपुर  की रहने वाली 10 साल की बालिका नीता नट पिता बसंत नट बीते करीब एक माह से नगर में विभिन्न स्थानो पर करतब दिखा रही है। बालिका रस्सी पर चढ़ कर सिर पर कलश रख कर पहिया, लाठी व थाली के साथ सधे हुए कदमों से करीब 50 फ़ीट रस्सी पर करतब दिखाती है।बालिका के भाई शिव प्रसाद ने बताया की करतब दिखाने से मिले पैसो से उसके परिवार का पालन पोषण होता है। प्रदेश के अनेक शहरो में इन करतबों का प्रदर्शन कर चुके है।नीता के भाई शिव प्रसाद का दुख है कि उसके परिवार को अभी तक मध्यप्रदेश या छत्तीसगढ़ सरकार से किसी भी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता नही मिली है और ना ही किसी योजना का लाभ ही मिल सका है। पेट के खातिर ही उसकी बहन खतरनाक करतब दिखा रही है।

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