पश्चिम रेलवे की सूरत स्टेशन की ‘सूरत’ बदलने की महत्त्वपूर्ण योजना

अहमदाबाद | गुजरात का सूरत शहर को पूरी दुनिया में हीरा उद्योग के साथ साथ इसके प्रसिद्ध वस्त्र उद्योग के लिए भी जाना जाता है। सूरत रेलवे स्टेशन इस व्यस्त शहर को रेल मार्ग से जोड़ता है तथा इसे ना केवल पश्चिम रेलवे, बल्कि संपूर्ण भारतीय रेल के व्यस्ततम स्टेशनों में गिना जाता है। मुंबई-दिल्ली रेल कॉरिडोर पर स्थित या एक प्रमुख स्टेशन है तथा यहां से उत्तर से दक्षिण एवं पूर्व से पश्चिम भारत की तरफ आने एवं जाने वाली ट्रेनें गुजरती है। इस स्टेशन से 150 से अधिक पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें से 21 ट्रेनें यहां से शुरू/समाप्त होती हैं। अतः सूरत स्टेशन पर रोजाना औसतन 45 ट्रेनों का परिचालन होता है। ट्रेनों के इन आंकड़ों में माल यातायात को नहीं दर्शाया गया है, जिनकी तादाद भी काफी अधिक है। वर्तमान में यात्रियों की यात्रा को सुखद बनाने के लिए सूरत स्टेशन पर पैदल ऊपरी पुल, सबवे, पुरुषों एवं महिलाओं के लिए प्रतीक्षालय, विश्राम-कक्ष, बाथिंग क्यूबिकल, सभी स्टेशन परिसरों में बैठने की व्यवस्था, वाटर कूलर, फूड प्लाज़ा, आपातकालीन चिकित्सा कक्ष आदि सुविधाएँ उपलब्ध हैं। मुंबई मंडल के दोहरीकृत एवं विद्युतीकृत उधना-जलगाँव खंड के शुरू होने के एक वर्ष के दौरान सूरत स्टेशन को मुख्यतः यात्री एवं माल यातायात से काफी लाभ पहुँचा है। गुजरात के सूरत जिले के उधना तथा उत्तरी महाराष्ट्र के जलगाँव जिले को जोड़ने वाली 307 किमी लम्बी इस दोहरीकरण परियोजना से इस रेल खंड के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के विकास में वृद्धि हो रही, जिसके अंतर्गत कुल 44 स्टेशन, 380 पुल, 31 पैदल ऊपरी पुल, 101 प्लेटफॉर्म हैं।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी रविंद्र भाकर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पश्चिम रेलवे यात्रियों के यात्रा अनुभव को अधिक सुखद, सुविधाजनक और आरामदेह बनाने के लिए हरसम्भव प्रयास कर रही है। सूरत स्टेशन के पुनर्विकास और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से एकीकृत हब के अंतर्गत बस टर्मिनल, मेट्रो, ऑटो रिक्शा और प्राइवेट वाहनों जैसी सेवाओं की संयुक्त सुविधा वाले मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब (MMTH ) का विकास करना इस दिशा में ऐसा ही एक कदम है। यह अत्याधुनिक एमएमटीएच रेलवे, गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) और सूरत महानगरपालिका (SMC) तीनों से भूमि अधिग्रहण करके 340131 वर्ग मीटर भूमि पर बनाया जायेगा। भारत में यह अपनी तरह की पहली परियोजना है, जिसमें केंद्र, राज्य और स्थानीय नगरपालिका को एक साथ जोड़ा गया है। रिक्त पड़ी रेल भूमि और एयर स्पेस पर 90 वर्षों की लीज अवधि के लिए लीज होल्डर राइट्स के तहत वाणिज्यिक विकास के जरिए स्टेशन का पुनर्विकास किया जाएगा । इस हब से वर्ष 2033 तक प्रतिदिन लगभग 4 लाख यात्रियों को और वर्ष 2053 तक प्रतिदिन लगभग 5 लाख 25 हज़ार यात्रियों को ये सभी सेवाएँ प्राप्त होने की उम्मीद है। वर्तमान में स्टेशन का निर्मित क्षेत्र लगभग 36950 वर्ग मीटर है और पुनर्विकास के पश्चात यह क्षेत्र लगभग 101750 वर्ग मीटर तक हो जायेगा ।
भाकर ने बताया कि इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (IRSDC), गुजरात स्टेट रोड ट्रांसर्पोट कॉर्पोरेशन (GSRTC) तथा सूरत म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (SMC) द्वारा सूरत इंटिग्रेटेड ट्रांसपोर्टेशन कम्पनी (SITCO) नामक एक विशेष उद्देश्य कम्पनी का गठन किया गया है। सूरत स्टेशन की स्टेशन पुनर्विकास परियोजना अपने भौगोलिक एवं आर्थिक महत्त्व के कारण सर्वाधिक महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत रेलवे स्टेशन भवन लगभग 55374 वर्ग मीटर में बनाया जायेगा। कॉनकोर्स के प्रत्येक ओर 100 मीटर तक मौजूद सभी रेलवे ट्रकों के ऊपर 16400 वर्ग मीटर की स्पेस फ्रेम रूफिंग और लगभग 10800 वर्ग मीटर तक प्लेटफॉर्म शेल्टर रूफिंग की जाएगी। लगभग 4 हज़ार वर्गमीटर के प्लेटफार्म फर्श पर ग्रेनाइट लगवाया जाएगा। पुनर्विकास कार्य के पश्चात स्टेशन पर पार्किंग के लिए लगभग 750 इक्विवेलेंट कार स्पेस (ECS) की आवश्यकता होगी। (मल्टीलेनल कार पार्किंग में 439 ईसीएस और सर्फ़ेस पार्किंग एरिया में 311 ईसीएस)। यह पार्किंग व्यवस्था स्टेशन भवन के पूर्व-पश्चिम छोर के नजदीक की जायेगी। मौजूदा सबवे और मौजूदा स्टेशन भवन का भूतल पार्सल सेवाओं के लिए उपयोग में लाया जाएगा। रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और वाणिज्यिक क्षेत्र के मध्य स्काईवॉक की कनेक्टिविटी 4290 वर्ग मीटर की होगी। सूरत एमएमटीएच में कुल 90 एस्केलेटर और 30 एलीवेटर्स का निर्माण किया जाएगा।
इनके साथ-साथ यात्रियों के आने-जाने की व्यवस्था भी अलग-अलग की जायेगी, जिससे एमएमटीएच पर भीड़ प्रबंधन करने में उल्लेखनीय रूप से सहायता मिलेगी। प्रतीक्षालयों एवं यात्रियों के बैठने की व्यवस्था आदि को दूसरी मंजिल पर स्थानांतरित किया जाएगा तथा शौचालय, टिकट काउंटर, पूछताछ काउंटर, क्लॉक रूम, पार्सल सुविधा, चिकित्सा कक्ष, प्रीपेड टैक्सी एवं सुरक्षा बल कक्ष आदि जैसी सुविधाओं को भी उच्च दर्जे तक अपग्रेड किया जाएगा। स्टेशन भवन के अग्रभाग में पर्याप्त सुधार किया जाएगा। साथ ही विचरण क्षेत्र में भी इस प्रकार से सुधार कार्य किया जायेगा, जिससे दैनिक यात्रियों की उचित रूप से आवाजाही सुनिश्चित हो सके। स्टेशन क्षेत्र की समुचित प्रकाश व्यवस्था के लिए लाइटिंग टावर लगाया जायेगा और सभी प्लेटफॉर्मों के लिए आधुनिक एवं लागत प्रभावी प्रकाश व्यवस्था भी की जायेगी। वाटर बूथों एवं पे एंड यूज शौचालयों का भी नवीकरण किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा एवं आराम के लिए प्रतीक्षालयों एवं विश्रामालयों में आधुनिक एवं आरामदेह फर्नीचरों की व्यवस्था की जाएगी। यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो इस दृष्टि से उनके मार्गदर्शन के लिए साइनेज एवं कोच इंडिकेशन वाला पैसेंजर गाइडेंस सिस्टम भी लगाया जाएगा। बेहतर प्रकाश व्यवस्था एवं बुकिंग खिड़कियों के सामने यात्रियों की कतार के लिए पर्याप्त स्थान की व्यवस्था करते हुए बुकिंग कार्यालयों एवं पूछताछ कार्यालयों में भी उचित बदलाव किए जायेंगे। सूरत एमएमसीएच को मॉडर्न फिक्सचर्स एवं आर्ट के जरिए सुसज्जित किया जाएगा, जिसके लिए वास्तुविद एवं परामर्शदाता हायर किये गये हैं। सूरत स्टेशन की सम्पूर्ण पुनर्विकास परियोजना भविष्य में रेलों के आधुनिकीकरण एवं प्रगति की दिशा में पश्चिम रेलवे के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगी।
