पानीपत थर्मल पावर स्टेशन के तीन कूलिंग टावर ध्वस्त, जानें क्यों किया गया ऐसा

पानीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन में रविवार को हरियाणा बिजली उत्पादन निगम के आदेश पर करीब 40 साल पहले बनी 110-110 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी, तीसरी, चौथी यूनिटों के कूलिंग टावरों को गिरा दिया गया। इस दौरान पानीपत पुलिस व केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की कड़ी सुरक्षा रही।
इन टावरों को गिराने के लिए 650 ग्राम डाइनामाइट का इस्तेमाल किया गया। थर्मल की पहली यूनिट के कूलिंग प्लांट को करीब एक माह पहले विस्फोटकों की सहायता से गिरा दिया गया था। इससे पहले पांच अगस्त को पहली यूनिट को गिरा दिया गया था।

पानीपत थर्मल में 1979 में बनी थर्मल पावर प्लांट की 110-110 मेगावाट क्षमता की एक से चार नंबर यूनिट को 2015 में कंडम घोषित कर बंद कर दिया गया था। उसके बाद से इसमें बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा था।

इन चारों यूनिटों के डिस्पोजल का ठेका मुंबई की कंपनी एचआर कामर्शियल को दिया गया था। इस कंपनी को ही इन चारों यूनिटों में बने कूलिंग टावर को गिराना था। जिनमें से यूनिट नंबर 1 के कूलिंग टावर को पांच अगस्त को ही ध्वस्त कर दिया गया था। रविवार को दूसरी, तीसरी व चौथी यूनिटों के कूलिंग टावरों को इमल्शन एक्सप्लोसिव के साथ विस्फोट कर गिराया गया।

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