पीएम मोदी को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने सुनाई बच्चे की कहानी, रहे गए हैरान

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशभर के एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बातचीत की। इस दौरान पीएम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की एक बच्चे को जिंदा करने की कहानी सुनकर हैरान रह गए और कार्यकर्ता की जमकर तारीफ की। पीएम से लाइव बातचीत करते हुए झारखंड के सरायकेला के उर्माल की रहने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मनीता देवी ने कहा कि उसने प्रसव के दौरान आपातकालीन सेवा प्रदान कर मां और बच्चे की जान बचाई। मनीता ने कहा कि उन्हें २७ अगस्त २०१८ को उस महिला की प्रसव पीड़ा के बारे में सुना था। जब तक वह उसके घर पहुंची तब तक उसका प्रसव हो चुका था। प्रसव के बाद बच्चा रो नहीं रहा था तो घर वालों को लगा कि वह मर गया है। घर वाले मांगने पर भी बच्चे को दे नहीं रहे थे जब उन्होंने जिद की तो उन्हें बच्चा दिया गया। वो बच्चा जीवित था और उसकी धड़कनें चल रही थीं। मनीता ने एक पाइप की सहायता से बच्चे के नाक और मुंह से पानी निकाला, जिसके बाद वह रोने लगा। मनीता की बात सुनकर पीएण ने ताली बजाई और कहा एक नवजात शिशु को परिवार वालों ने मृत मान लिया था। नवजात केयर प्रशिक्षण का उपयोग कर मनीता देवी ने उपचार प्रारंभ किया, एंबुलेंस के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्र ले गईं। वह भारत की सच्ची बेटी हैं।
– पोषण पर ध्यान दे रही सरकारपीएम ने
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पोषण और स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर ध्यान देगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सुपोषण स्वास्थ्य मेले का आयोजन होता है। मेले के दौरान कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण, ग्राम स्तर पर सामुदायिक बैठकों का आयोजन और कुपोषित बच्चों के घर भ्रमण करते हुए परामर्श का काम। पीएम ने कहा कि किसी भी शिशु के लिए जीवन के पहले एक हजार दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान मिला पौष्टिक आहार, खान-पान की आदतें ये तय करती हैं कि उसका शरीर कैसा बनेगा, पढ़ने-लिखने में वो कैसा होगा, मानसिक रूप से कितना मजबूत होगा। यदि देश का नागरिक सही से पोषित होगा, विकसित होगा तो देश के विकास को कोई नहीं रोक सकता है। लिहाजा शुरुआती हजार दिनों में देश के भविष्य की सुरक्षा का एक मजबूत तंत्र विकसित करने का प्रयास हो रहा है
– लोगों तक पहुंचानी मातृत्व की जानकारी
पीएम ने कहा कि बच्चे की ही नहीं बल्कि प्रसूता माता के स्वास्थ्य की भी आप सभी चिंता कर रहे हैं। सुरक्षित मातृत्व अभियान जो सरकार ने चलाया है उसकी अधिक से अधिक जानकारी आपको लोगों तक पहुंचानी है। पहले जन्म के ४२ दिन तक आशा वर्कर को ६ बार बच्चे के घर जाना होता था। अब १५ महीने तक ११ बार आपको बच्चे का हालचाल जानना जरूरी है। मुझे विश्वास है कि आपके स्नेह और अपनेपन से एक से एक बेहतरीन नागरिक देश को मिलेंगे। पीएम ने कार्यकर्ताओं के काम की सराहना करते हुए कहा कि आपको ये भी जानकारी है कि होम बेस्ड न्यूबोर्न केयर के माध्यम से आप हर वर्ष देश के लगभग १.२५ करोड़ बच्चों की देखभाल कर रहे हैं। आपकी मेहनत से ये कार्यक्रम सफल हो रहा है, जिसके कारण इसको और विस्तार दिया गया है। अब इसको होम बेस्ड चाइल्ड केयर का नाम दिया गया है। एनीमिया हर वर्ष सिर्फ एक प्रतिशत की दर से घट रही है। राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत इस गति को तीन गुना किया जाए। 'एनीमिया मुक्त भारत' के इस संकल्प को आप सभी पूरी ताकत से पूरा करने वाले हैं। एनीमिया से मुक्ति का मतलब लाखों गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जीवन दान।
– लोगों को करना जागरुक
पीएम ने सभी कार्यकर्ताओं को आयोडीन और आयरन युक्त डबल फोर्टिफाइड नमक के इस्तेमाल के लिए लोगों को और जागरूक करने को कहा ताकि एनीमिया जैसी बीमारियों को दूर किया जा सके। देश में काफी संख्या में लोग एनीमिया के शिकार हैं। ये बीमारी आयोडीन और आयरन जैसे तत्वों की कमी से होती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आयोडीन युक्त नमक का उपयोग बढ़ा है। पीएम को कर्नाटक की मलम्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से मां और बच्चों को भरपूर फायदा हो रहा है। इस योजना से मां और बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिल रही है। पीएम ने कहा मैं देश के उन हजारों-लाखों डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जो बिना कोई फीस लिए, गर्भवती महिलाओं की जांच कर रहे हैं। सिलवासा की नीता कल्पेश ने पीएम को बताया कि कैसे आयोडिन युक्त नमक को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाई। प्रधानमंत्री ने उनके इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाई दी। पीएम ने कहा कि मुझे खुशी है आप सभी देश के भविष्य को मजबूत करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है , देश की हर माता हर शिशु के सुरक्षा घेरे को मजबूत करने का जिम्मा आपने अपने कंधो पर उठाया है।
पीएम ने कहा कि वेक्सिनेशन के लिए सरकार काम कर रही है। जिससे महिलाओं और बच्चों की मदद हो रही है। राजस्थान के झुंझुनू से पोषण अभियान शुरू हुआ था, जिसमें महिलाओं और बच्चों का शामिल होना जरूरी है।
