प्राकृतिक सम्पदा संरक्षण में जरूरी है समाज की सक्रिय भागीदारी

भोपाल। विश्व प्रकृतिक निधि मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ ईकाई सलाहकार समिति के अध्यक्ष एंन्टोनी डिसा ने कहा है कि विकास तभी सार्थक है जब उसका प्रकृति के साथ संतुलन रहे। साथ ही पर्यावरण को न्यूनतम क्षति हो। उन्होंने कहा कि इसके लिये प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करते हुये उनका न्यूनतम और आवश्यकतानुसार ही उपयोग किया जाना चाहिये। साथ ही प्राकृतिक संपदा के सरंक्षण के प्रयासों में तेजी लाने और उन्हें व्यापक बनाने की जरूरत है। प्राकृतिक सम्पदा संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों और प्रयासों में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी जुटाने के कार्य में जागरूक किया जाना चाहिए। डिसा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की विश्व प्रकृति निधि के सलाहकार समिति की भोपाल में आयोजित तीसरी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में पिछली दो बैठकों में लिए गये निर्णयों पर अमल की समीक्षा की गयी और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विचार किया गया। बैठक में अर्थ ऑवर केम्पेन को अगले स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया गया। इस कार्य में सभी शासकीय एजेंसियों का सहयोग लिया जाएगा। इसके अंतर्गत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहरों के नये स्थानों को शामिल किया जाएगा। बैठक में आगामी नवम्बर में भारत में विश्व प्रकृति निधि के 50वें वर्ष की शुरूआत के अवसर पर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विचार किया गया। बैठक में बताया गया कि गत दिसंबर माह में 10 गावों में प्रकृति और जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें 500 से अधिक लोगों को वनों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। पन्ना नेचर केम्प द्वारा जनवरी में 2 प्रकृति शिविर आयोजित किये गये, जिनमें 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। महाविद्यालयों में पेंगोलिन दिवस- सिग्नेचर केम्पेन का आयोजन किया गया, जिसमें 700 से अधिक विद्यार्थियों ने पेंगोलिन की सुरक्षा के लिए शपथ पात्र पर हस्ताक्षर किये। साथ ही मार्च में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। इसी प्रकार पृथ्वी दिवस, अर्थ ऑवर, विश्व पर्यावरण दिवस सहित विभिन्न अवसरों पर प्रकृति के संरक्षण के लिए आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी दी गयी। वन जीव प्राकृतिक सम्पदा के संरक्षण के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाने हेतु उन्हें निश्चित करने की श्रृंखला में वाईल्ड विसडम क्यूज-19 विषय स्कूलो में शासन के सहयोग से आयोजित करने हेतु पर सहमति बनी तथा वन प्लेनेट एकेडमी पोर्टल पर ज्यादा से ज्यादा स्कूली छात्रों का पंजीयन गिवअप नीति के अंतर्गत हितग्राही संस्थाओं के साथ भागीदारी बनाने पर चर्चा की गई। बैठक में अधिक से अधिक स्कूली बच्चों को प्रकृति के संरक्षण कार्य से जोडऩे का निर्णय लिया गया। इसमें शिक्षकों और प्राचार्यों का सहयोग लिया जाएगा। इसमें राज्य का शिक्षा विभाग पूरा सहयोग करेगा। बैठक में विश्व प्राकृति निधि की म.प्र. राज्य की संचालक श्रीमती संगीता सक्सेना ने वर्तमान में विश्व प्राकृति निधि की प्रदेश में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।

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