बरगाड़ी बेअदबी कांड: 4 साल 4 एजेंसियां, पंजाब पुलिस बनाम सीबीआई की जांच में उलझा इंसाफ

सिख समाज की भावनाओं की तार तार करने वाले बरगाड़ी बेअदबी कांड को आज पूरे चार साल बीत चुके है, लेकिन इंसाफ सिर्फ जांच में ही उलझ कर रह गया। इन चार सालों में से पिछली शिअद भाजपा सरकार के डेढ़ साल और वर्तमान कांग्रेस सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में पंजाब पुलिस की एसआईटी, सीबीआई, जस्टिस जोरा सिंह आयोग और जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की जांच के बावजूद अभी तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी करने वाले असली दोषियों की ही पहचान नहीं हो पाई है।
हालांकि पंजाब पुलिस की एसआईटी ने पिछले साल अपनी जांच में बरगाड़ी बेअदबी के लिए डेरा सच्चा सौदा सिरसा के 10 अनुयायियों को आरोपी ठहराया था और इस केस की जांच सीबीआई के पास होने के चलते अपनी रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी थी लेकिन सीबीआई ने अपनी जांच के बाद पंजाब पुलिस की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है और बेअदबी मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। इस दौरान बरगाड़ी बेअदबी मामले में पंजाब पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार मुख्य आरोपी व डेरा सिरसा की 45 मेंबरी कमेटी के सदस्य महिंदरपाल बिट्टू की 22 जून 2019 को नाभा जेल में हत्या हो चुकी है।
ऐसे हुई घटना और शुरू हुई जांच
जानकारी के अनुसार, चार साल पहले 12 अक्तूबर 2015 को गांव बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी करने का मामला सामने आया था। इस घटना से सिख संगत में व्यापक स्तर पर रोष फैल गया था। इसके खिलाफ प्रदेश भर में जगह जगह रोष प्रदर्शन हुए और राज्य की सभी मुख्य सड़कों पर चक्का जाम कर दिया गया।
लोगों में इस बात को लेकर रोष था कि बेअदबी की घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों ने घटना से करीब साढ़े तीन माह पहले एक जून 2015 को बरगाड़ी से सटे गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ का स्वरूप चोरी किया और इसके बाद 24-25 सितंबर 2015 की रात को गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला में ही गुरुद्वारा साहिब के बाहर अश्लील शब्दावली वाला पोस्टर लगाकर पुलिस प्रशासन व सिख संगत को चुनौती दी थी।
पुलिस पावन ग्रंथ की चोरी व पोस्टर लगाने के मामलों का कोई सुराग नहीं ढूंढ पाई और पोस्टर लगाने की घटना के 18 दिन बाद ही बरगाड़ी में पावन ग्रंथ की बेअदबी कर दी गई। इस मामले में उस समय और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब 14 अक्तूबर 2015 को बरगाड़ी से ही सटे गांव बहिबल कलां में बेअदबी मामले को लेकर सिख संगत के शांतिपूर्ण धरने को जबरन उठाने के लिए पुलिस ने सीधी फायरिंग कर दी जिसमें दो सिख नौजवानों गांव नियामीवाला के किशन भगवान सिंह और गांव सरावां के गुरजीत सिंह की मौत हो गई।
उसी दिन बहिबल कलां से पहले कोटकपूरा के मुख्य चौक में भी चल रहे रोष धरने को पुलिस ने बल उपयोग करते हुए उठवाया और पुलिस के लाठीचार्ज व फायरिंग से करीब 100 लोग घायल हुए।
फिर यूं चला जांच का क्रम
इन सभी घटनाओं की पहले चरण में जांच का काम पंजाब पुलिस ने संभाला और बहिबल कलां गोलीकांड की घटना सामने आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 15 अक्तूबर को केस की जांच के लिए पंजाब पुलिस के डायरेक्टर ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन इकबालप्रीत सिंह सहोता की अध्यक्षता में एसआईटी बनाने और पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस जोरा सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन करवाया।
अगले दिन 16 अक्तूबर को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने 14 अक्तूबर की घटनाओं के संदर्भ में पुलिस की तरफ से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने का ऐलान किया। पंजाब पुलिस की तरह उसकी एसआईटी भी आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही। हालांकि एसआईटी ने 20 अक्तूबर 2015 को सिख जत्थेबंदियों से जुड़े गांव पंजगराईं खुर्द से संबंधित दो भाईयों को केस में शामिल होने के आरोपों के तहत पकड़ा लेकिन कई दिन रिमांड में रखने के बाद भी वह उनके खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर पाई।
आखिरकार उन्हें केस से डिस्चार्ज करना पड़ा। एसआईटी के विफल रहने पर बैकफुट पर आई राज्य सरकार ने नवंबर 2015 में यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के हवाले कर दिया। लंबी छानबीन के बाद सीबीआई भी इस केस में रत्ती भर भी सुराग नहीं ढूंढ पाई। जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने भी पड़ताल के बाद 30 जून 2016 को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी और इस रिपोर्ट को सरकार ने सार्वजनिक करना ही जरूरी नहीं समझा।
न्यायिक आयोग का गठन तक किया गया
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा चुनाव के समय किए गए वादे के मुताबिक अपनी सरकार गठित होने के कुछ दिन बाद ही 14 अप्रैल 2014 को हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रणजीत सिंह की अध्यक्षता में बेअदबी मामलों की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था।
आयोग ने बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित घटनाओं समेत राज्य की घटित बेअदबी की सभी घटनाओं की जांच करने के बाद 16 अगस्त 2018 को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी। इस रिपोर्ट को पंजाब सरकार ने 27 अगस्त 2018 को पंजाब विधानसभा में पेश कर दिया था।
बेअदबी मामले में नहीं आया किसी राजनेता का नाम
बरगाड़ी बेअदबी मामले तो अभी किसी ठोस नतीजे पर ही नहीं पहुंचा है लेकिन पावन ग्रंथ की बेअदबी से जुड़ी बाकी घटनाओं में से अभी तक किसी भी घटना में सीधे रूप से किसी राजनेता का नाम सामने नहीं आया है लेकिन इसके बावजूद पिछले चार साल से ही बेअदबी के मुद्दे पर बादल परिवार की घेराबंदी हो रही है।
पंजाब पुलिस की एसआईटी द्वारा मोगा के मल्लके व बठिंडा के गांव गुरूसर की बेअदबी घटनाओं की जांच में डेरा सिरसा के प्रेमियों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ चालान भी पेश हो चुका है। बरगाड़ी मामले की पड़ताल में ही सिर्फ डेरा प्रेमियों को भी आरोपी ठहराया गया है।
पंजाब पुलिस के दावे पर सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट
पिछले साल सिख जत्थेबंदियों ने बेअदबी मामले में इंसाफ के लिए 1 जून 2018 से लेकर 9 दिसंबर 2018 तक बरगाड़ी की अनाज मंडी में बरगाड़ी मोर्चा लगाया था। यह मोर्चा शुरू होते ही डीजीपी पंजाब द्वारा 30 नवंबर 2015 को उसी साल 20 अक्तूबर व 2 नवंबर को गांव मल्लके (मोगा) और गुरुसर (बठिंडा) में पेश आई बेअदबी की घटनाओं की जांच के लिए गठित डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा की अगुवाई वाली एसआईटी अचानक हरकत में आ गई।
उसने इन दोनों मामलों समेत मार्च 2011 में आगजनी व सरकारी संपत्ति की तोड़फोड़ से संबंधित मोगा के एक केस में डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायियों की धरपकड़ शुरू कर दी। एसआईटी ने सबसे पहले 9 जून 2018 को डेरा की 45 मेंबरी प्रांतीय कमेटी के सदस्य महिंदरपाल बिट्टू को पकड़ा और उसके बाद कुछ और डेरा प्रेमी गिरफ्तार किए गए। इन घटनाओं की पड़ताल के दौरान एसआईटी ने खुलासा किया कि मोगा की घटना में गिरफ्तार महिंदरपाल बिट्टू समेत 10 डेरा अनुयायियों की बरगाड़ी बेअदबी केस से संबंधित तीनों घटनाओं में शमूलियत पाई गई है।
चूंकि इन घटनाओं की जांच सीबीआई के पास थी, ऐसे में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट को सीबीआई के हवाले कर दिया। एसआईटी की उक्त जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद सीबीआई ने इन 10 डेरा अनुनायियों में से एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार तीन प्रमुख आरोपियों महिंदरपाल बिट्टू , सुखजिंदर सिंह सन्नी व शक्ति सिंह को 5 जुलाई 2018 को अपनी हिरासत में लिया और मोहाली की सीबीआई कोर्ट से 7 दिन का रिमांड लेकर पूछताछ की गई।
साथ ही एसआईटी की रिपोर्ट में आरोपी ठहराए गए बाकी 7 डेरा अनुयायियों से भी फरीदकोट जेल में पूछताछ हुई लेकिन इसके बाद सीबीआई की तरफ से इस केस में कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई जिसके चलते इन तीनों को मोहाली की सीबीबाई कोर्ट से 7 सितंबर 2018 को जमानत भी मिल गई। उसके बाद से ही यह केस ठंडे बस्ते में पड़ा था लेकिन 4 जुलाई 2019 को सीबीआई ने उक्त केस में क्लोजर रिर्पोट पेश करके पंजाब पुलिस की एसआईटी की जांच रिर्पोट को ही सिरे से खारिज करके एक विवाद खड़ा कर दिया है।
सीबीआई के मापदंडों पर खरी नहीं उतरी पंजाब पुलिस की जांच
सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में बेअदबी मामले में अपनी जांच प्रक्रिया के हर पहलु को सामने रखा है और पंजाब पुलिस की जांच पर बड़े सवाल खड़े किए है। बरगाड़ी बेअदबी मामले की पड़ताल में पंजाब पुलिस के विफल रहने के बाद तत्कालीन शिअद सरकार ने 2 नवंबर 2015 को बरगाड़ी बेअदबी से जुड़ी तीनों घटनाओं ( पावन स्वरूप चोरी होने, गुरूद्वारा साहिब के बाहर पोस्टर लगाने व पावन स्वरूप की बेअदबी करने) की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को सौंप दी थी। क्लोजर रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई ने बरगाड़ी बेअदबी केस को सुलझाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
जांच के तहत गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला, बरगाड़ी समेत आसपास के गांवों के मोबाइल टावरों से फोन काल्ज डिटेल का डाटा चेक किया गया और अनेकों अनेक लोगों के फिंगर प्रिंट लेकर भी जांच में शामिल किए लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। मई 2016 में सीबीआई ने बेअदबी मामले का सुराग देने वाले के लिए 10 लाख रूपये ईनाम भी रखा लेकिन कोई सामने नहीं आया। उक्त केस के समय राज्य भर में 53 बेअदबी के केस पेश आए थे जिनमें से कई केस पुलिस ने सुलझा लिए थे।
सीबीआई ने इन केसों में पकड़े गए आरोपियों के साथ साथ जांच अधिकारियों से भी जानकारी जुटाई लेकिन किसी से भी बरगाड़ी केस का सुराग नहीं मिला। सीबीआई के अनुसार पंजाब पुलिस द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने अपनी जांच को आगे बढ़ाया लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। सीबीआई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं मिला। इसके बाद सीबीआई ने पंजाब पुलिस द्वारा आरोपी ठहराए गए सभी 10 डेरा अनुयायियों समेत कुल 49 संदिग्ध लोगों के फिंगरप्रिंट व हेड राइटिंग की जांच करवाई।
साथ ही डेरा प्रेमी महिंदरपाल बिट्टू, सुखजिंदर सिंह सन्नी व शक्ति सिंह की लाई डिटेक्टिव टेस्ट समेत अन्य फोरेंसिक व मनोवैज्ञानिक टेस्टों के साथ साथ लेयरड वायस ऐलिसिस टेस्ट, नई दिल्ली स्थित सीएफएसएल से करवाए गए लेकिन रत्ती भर भी सुराग नहीं मिला। केस की तह पर पहुंचने के लिए सीबीआई ने केस के शिकायतकर्ता ग्रंथी गोरा सिंह, उसकी पत्नी स्वर्णजीत कौर के अलावा गुरमुख सिंह, जसवंत सिंह लक्की, अमनदीप सिंह समेत कुल 18 लोगों के पोलीग्राफ टेस्ट भी करवाए लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ पाई।
सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उसे पंजाब पुलिस के उस दावे में भी कोई सच्चाई नहीं मिली जिसमें उन्होंने तथाकथित आरोपी डेरा प्रेमियों के घटना में दो गाडिय़ां उपयोग का खुलासा किया गया था। पंजाब पुलिस के अनुसार बुर्ज जवाहर सिंह से पावन ग्रंथ चोरी करने के लिए शक्ति सिंह ने अपनी आल्टो कार नंबर पीबी-30 आर-6480 का प्रयोग किया लेकिन सीबीआई ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह गाड़ी शक्ति सिंह के भाई रविंदर सिंह ने 28 अगस्त 2016 को मलोट की एक फर्म से खरीदी थी जिसपर पहले दिल्ली का नंबर था जबकि यह घटना जून 2015 की है।
इसके अलावा पावन ग्रंथ की बेअदबी के बाद बाकी हिस्से को ठिकाने लगाने के लिए महिंदरपाल बिट्टू द्वारा इंडिगो कार नंबर पीबी-11 डब्ल्यू-7114 का प्रयोग करने का दावा किया गया जबकि यह कार घटना के काफी समय बाद जनवरी 2017 में महिंदरपाल बिट्टू के बेटे दविंदर ने खरीदी थी। सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कुल 106 गवाहों के ब्यानों का उल्लेख किया है।
एसआईटी अभी भी अपने स्टैंड पर कायम
सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के बावजूद पंजाब पुलिस की एसआईटी अभी भी अपने स्टैंड पर कायम है और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के बाद सीबीआई कोर्ट में दाखिल जबाव में पंजाब पुलिस ने सीबीआई की जांच पर कई तरह के सवाल उठाए है।
एसआईटी के पास अहम सुबुत के रूप में महिंदरपाल बिट्टू का कबुलनामा है जिसके तहत उसने 20 जून 2018 को मोगा में जेएमआईसी की अदालत में अपना ब्यान दर्ज करवाकर बरगाड़ी बेअदबी मामले में शमूलियत को स्वीकार किया था। इसके अलावा एसआईटी के माध्यम से गोपालकृष्ण नामक बरगाड़ी के एक दुकानदार भी अदालत में ब्यान दर्ज करवाकर दावा किया था कि बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरूद्वारा साहिब के बाहर पोस्टर लगाने के लिए कागज व लिखने के लिए मार्कर आदि को शक्ति सिंह ने उसकी दुकान से खरीदा था।
इसके अलावा जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट आने के बाद 28 अगस्त 2018 को पंजाब विधानसभा ने प्रस्ताव पारित करके बेअदबी मामले की जांच सीबीआई से वापिस लेने की घोषणा कर दी थी जिसका 6 सितंबर 2018 को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई द्वारा अपनी पड़ताल जारी रखना और क्लोजर रिपोर्ट देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
आखिरकार कब मिलेगा शहीद नौजवानों के परिवारों को इंसाफ
बरगाड़ी बेअदबी की घटना सामने आते ही हजारों की तादाद में सिख संगत बरगाड़ी पहुंच गई और पावन ग्रंथ के खंडित पन्नों को साथ लेकर उसी दिन कोटकपूरा के मुख्य चौक में बेमियादी धरना शुरू कर दिया गया। 14 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने लाठी व गोली का प्रयोग करते हुए इस धरने को जबरन उठवाया जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। कोटकपूरा में धरना उठवाने के बाद बरगाड़ी से सटे गांव बहिबल कलां में रोष धरने पर बैठी सिख संगत पर भी पुलिस द्वारा फायरिंग की गई जिसमें गांव सरावां के गुरजीत सिंह व गांव नियामीवाला के किशन भगवान सिंह की मौत हो गई थी।
शहीद दोनों सिख नौजवानों के परिवारों समेत घायलों को अभी भी इंसाफ की राह ताक रहे है। हालांकि बहिबल गोलीकांड मामले में तो 21 अक्टूबर 2015 को थाना बाजाखाना में अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस दर्ज किया गया था लेकिन कार्यवाही कोई नहीं की गई थी। पिछले साल जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंजाब सरकार ने 12 अगस्त 2018 को बहिबल गोलीकांड वाले केस में तत्कालीन एसएसपी मोगा चरनजीत सिंह शर्मा,एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह,एसएसपी मोगा के रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह व तत्कालीन थाना बाजाखाना प्रभारी एसआई अमरजीत सिंह कुलार को नामजद किया गया।
इसके अलावा कोटकपूरा के मुख्य चौक में जत्थेबंदियों के धरने पर फायरिंग मामले में भी आयोग की सिफारिश पर 7 अगस्त 2018 को अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर इरादा ए कत्ल की एफआईआर दर्ज की गई है। आयोग की ही हिदायत पर पंजाब सरकार ने गोलीकांड मामलों की जांच के लिए एडीजीपी प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया जिसने अब तक की पड़ताल के आधार पर बहिबल गोलीकांड केस में पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा और कोटकपूरा गोलीकांड में पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा के अलावा शिअद के पूर्व विधायक मनतार सिंह बराड़, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, एसपी बलजीत सिंह, एसपी परमजीत सिंह पन्नू, एसआई गुरदीप सिंह पंधेर के खिलाफ जिला अदालत में चालान पेश किया जा चुका है और उन पर आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है।
टाइम लाइन
1 जून 2015-बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरूद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ की चोरी
25 सितंबर 2015-बुर्ज जवाहर सिंह के गुरूद्वारा साहिब के बाहर पोस्टर लगाने की घटना
12 अक्तूबर 2015-बरगाड़ी के गुरूद्वारा साहिब के बाहर पावन ग्रंथ की बेअदबी
14 अक्तूबर 2015-बहिबल कलां में पुलिस फायरिंग में दो नौजवानों की मौत
14 अक्तूबर 2015-कोटकपूरा के मुख्य चौक में पुलिस कार्यवाही से 100 लोग घायल
15 अक्तूबर 2015-मुख्यमंत्री ने एसआईटी व न्यायिक आयोग का गठन करवाया
20 अक्तूबर 2015 -एसआईटी ने दो भाईयों को पकड़ा जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया
21 अक्तूबर 2015-बहिबल गोलीकांड के मामले में अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस
15 नवंबर 2015-राज्य सरकार ने बेअदबी मामले की जांच सीबीआई को सौंपी
30 जून 2016-जस्टिस जोरा सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी
14 अप्रैल 2017-कैप्टन सरकार ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग का गठन किया
16 अगस्त 2118-जस्टिस रणजीत सिंह ने मुख्यमंत्री को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी
27 अगस्त 2018-जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई
10 सितंबर 2018-एडीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन
22 जून 2019-नाभा जेल में डेरा प्रेमी महिंदरपाल बिट्टू की हत्या
