बरेली आईवीआरआई में बनेंगी हर्बल दवाएं

बैक्टीरीया पर बेअसर हो रहीं एंटीबायोटिक का तोड़ निकालने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिक हर्बल दवाएं तैयार करेंगे। इसके लिए आईवीआरआई को 20 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मिला है। 2021 तक इसे पूरा करना है। इसके तहत न्यू जेनरेशन वैक्सीन, डायग्नोस्टिक किट, जीनोमिक्स सेलेक्शन और पशुओं के लिए बदलते माहौल में पोषण की जरूरत पूरा करने के लिए डाइट तक बनाया जाएगा। महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए कई प्रमुख शोध संस्थानों से आईवीआरआई को मुकाबला करना पड़ा। दरअसल आईवीआरआई ने सेंटर फॉर एडवांस एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (कास्ट) के सामने पूरा प्रोजेक्ट रखा था। इसको प्रोजेक्ट को मॉनीटरिंग कमेटी ने हरी झंडी दी। वर्ल्ड बैंक ने पैसा रिलीज किया और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आईवीआरआई को प्रोजेक्ट सौंप दिया। यह प्रोजेक्ट तीन साल का है। आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए वैज्ञानिक और शोध छात्रों का चयन कर लिया गया है। जुलाई से उनको विदेश भेजा जाएगा। आईवीआरआई 9 इंप्रूव्ड वैक्सीन तैयार करेगा और 6 बीमारियों के नैदानिक (फील्ड आधारित डायग्नोस्टिक किट) भी तैयार की जाएगी।  

थनैला और डायरिया के लिए भी हर्बल दवाएं 

केंद्र सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने का प्रयास कर रही है। इसके लिए रिसर्च पर जोर दिया जा रहा है पर दुधारू जानवरों में थनैला और डायरिया ऐसी बीमारियां हैं जिससे उनकी उत्पादन क्षमता कम होती है। इसके लिए इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक से भी बैक्टीरीया प्रतिरोधी क्षमता हासिल करते जा रहे हैं। ऐसे में एंटीबायोटिक की जगह हर्बल दवाएं तैयार होंगी। इसकी कमान महामारी विभाग के हेड प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह पर है। विकसित देशों की तकनीक को जानेंगे वैज्ञानिक प्रोजेक्ट के लिए आईवीआरआई वैज्ञानिकों और शोध छात्रों को अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान और आस्ट्रेलिया भेजा जाएगा। इसमें 17 वैज्ञानिक और 40 एमसीएससी और पीएचडी स्टूडेंट शामिल हैं। इन सबको लेटर भी भेज दिया गया है। जून, जुलाई से वे विदेश दौरों पर जाने शुरू हो जाएंगे। विदेशों से 11 प्रोफेसर  बुलाए जाएंगे।   
 

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