बाड़ाबंदी में भिड़े गहलोत और पायलट गुट के पार्षद, एक-दूसरे पर बरसाए पत्थर

चूरू/सीकर. निकाय चुनाव के बाद जीते हुये पार्षदों की चल रही बाड़ाबंदी में भी गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है. ऐसा ही एक मामला सीकर जिले के खाटूश्याम जी में सामने आया है. यहां चूरू की सरदारशहर नगरपालिका (Sardarshahar Municipality) के लिये चुने गये कांग्रेस के पार्षदों की बाड़ाबंदी गई है. यहां मौजूद कांग्रेस पार्षद आपस में ही भिड़ गए. इनमें एक गुट गहलोत और दूसरा पायलट (Ashok Gehlot Vs Sachin Pilot) से जुड़ा हुआ है.
दोनों गुटों के पार्षदों के बीच जमकर पथराव भी हुआ. सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुंची, लेकिन किसी भी पक्ष ने किसी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं कराया है. विवाद के दो कारण सामने आ रहे हैं. इनमें निकाय प्रमुख पद के विवाद को लेकर नामांकन और दूसरा एक गुट द्वारा जबर्दस्ती दूसरे गुट के पार्षद को अपने पक्ष में करने की कोशिश बताई जा रही है.
दो पार्षदों के अपहरण का आरोप
जानकारी के अनुसार, सरदारशहर से जीते कांग्रेसी पार्षदों की बाड़ाबंदी खाटूश्यामजी में गोल्डन वाटर पार्क के पास धर्मशाला सावरथिया में की गयी है. इस दौरान बाड़ाबंदी में बंद दो पार्षदों को लेने के लिये सरदारशहर से कुछ लोग खाटूश्यामजी पहुंचे. इससे दोनों पक्षों में पत्थरबाजी व मारपीट हो गयी. धर्मशाला में ठहरे पार्षदों ने बाहर खड़े लोगों पर पत्थर फेंके. मारपीट की सूचना मिलते ही थानाधिकारी पूजा पुनिया मौके पर पहुंचीं और उन्हें समझाने का प्रयास किया. बाहर से आये लोगों ने धर्मशाला में बंद दो पार्षद शिवभगवान सैनी और राजकुमारी को अपरहण कर लाये जाने का आरोप लगाया.
पार्षदों ने स्वेच्छा से रुकने की बात कही
इस पर थानाधिकारी ने धर्मशाला के अंदर उपस्थित उन पार्षदों के बयान लिये. इस पर पार्षदों ने स्वेच्छा से वहां रुके रहने की बात कही. मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ रींगस भी मौके पर पहुंचे और शांति व्यवस्था बनायी. बताया जा रहा है इस बाड़ाबंदी में पार्षदों के दो गुट हैं. इनमें एक गहलोत और दूसरा पायलट समर्थक है. दोनों गुट पार्षदों को अपने-अपने पक्ष में एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं.
किसी भी गुट ने मामला दर्ज नहीं कराया
धर्मशाला में ठहरे हुए पार्षदगण पायलट के गुट हैं, जबकि बाहर विरोध जता रहे गहलोत गुट के हैं. रींगस पुलिस उपाधीक्षक बनवारीलाल धायल ने हालात को देखते हुए अतिरिक्त जाप्ता लगाकर दोनों गुटों को पाबंद किया है. अभी तक इस मामले में किसी भी गुट ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं करायी है. उल्लेखनीय है कि अभी तक निकाय प्रमुखों के चुनाव नहीं हुये हैं. अपने-अपने गुट के निकाय प्रमुख बनाने के लिये पार्षदों की बाड़ाबंदी की जा रही है.
