बुजुर्ग के पास नहीं था आधार कार्ड, सर्द रात में रैन बसेरे में नहीं मिली एंट्री, ठिठुरता रहा, मौत

सिरोही. राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड (Abu road ) में शर्मनाक हादसा सामने आया है. यहां आधार कार्ड (Aadhar Card ) के अभाव में एक बुजुर्ग को सर्द रात में रैन बसेरे में एंट्री नहीं मिली. इसका नतीजा यह हुआ है कि बुजुर्ग हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में रातभर बाहर ठिठुरता रहा और सुबह उसकी मौत हो गई. नियम कायदों की आड़ में बुजुर्ग को रैन बसेरे का सहारा नहीं मिल सका और वह दुनिया से रुखसत हो गया. मृतक की अभी तक पहचान नहीं हो पायी है. बुजुर्ग के शव को स्थानीय अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है.

जानकारी के अनुसार यह दर्दनाक वाकया दो दिन पहले हुआ था. 24 जनवरी की खून जमा देने वाली सर्द रात में एक बुजुर्ग रैन बसेरे में आसरा लेने के लिये आया. इस बुजुर्ग के पास आधार कार्ड नहीं था. इसके चलते उसे रैन बसेरे में एंट्री नहीं मिल सकी. बताया जा रहा है कि बुजुर्ग ने रैन बसेरे में आश्रय देने के लिये वहां मौजूद कर्मचारियों से लाख मिन्नतें की लेकिन उन्होंने नियम कायदों का हवाला देते हुये आधार कार्ड के अभाव में एंट्री देने से मना कर दिया. बुजुर्ग के पास दूसरा भी कोई पहचान पत्र नहीं था.
मृतक की अभी तक नहीं हो पाई है पहचान
इस पर बुजुर्ग मजबूरन पूरी रात सर्द हवाओं के बीच सड़क पर ही बैठा रहा. इसके कारण उसकी तबीयत खराब हो गई. 25 जनवरी को सुबह उसकी मौत हो गई. सुबह नगरपालिका के कर्मचारियों को बुजुर्ग का शव पड़ा मिला. इस पर वे शव वाहिनी लाकर आये उस अज्ञात वृद्ध के शव को उठाकर स्थानीय सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया. सूचना पर स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और कागजी खानापूर्ति करने में लग गई.

24 जनवरी को मांउट आबू में तापमान -2 डिग्री था
सिरोही जिले में इस बार रिकॉर्ड तोड़ सर्दी पड़ रही है. आबू रोड से मांउट आबू करीब 30 किलोमीटर दूर पड़ता है. 24 जनवरी को माउंट आबू में -2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है उसके पास स्थित आबू रोड में सर्दी का आलम क्या रहा होगा. माउंट आबू में इस कई दफा तापमान माइनस से नीचे जा चुका है.

चेयरमैन बोले कर्मचारियों की कोई गलती नहीं
इस संबंध में आबूरोड नगर पालिका के चेयरमैन मगनदान चारण से जानकारी चाही तो उन्होंने इससे पल्ला झाड़ लिया. चेयरमैन मदनदान ने कहा कि यह रैन बसेरे के बाहर की घटना है. इसमें रैन बसेरे के कर्मचारियों की कोई गलती नहीं है. वृद्ध की मौत रैन बसेरे के बाहर हुई है. वहीं पुलिस भी इस मामले में कोई बयान देने से बचती नजर आई.

जरुरतमंदों के लिये ही बनाये जाते हैं रैन बसेरे
उल्लेखनीय है कि सर्दी के मौसम में स्थानीय प्रशासन की ओर से रैन बसेरे बनाये जाते हैं ताकि जरुरतमंदों को उनमें शरण दी जा सके और सर्दी के कारण किसी की जान नहीं जाये. लेकिन आबूरोड की इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और सरकार की संवेदनशीलता की पोल खोलकर रख दी है. बहरहाल बुजुर्ग की मौत आबूरोड में चर्चा का विषय बनी हुई है.

Leave a Reply