भाई को सिपाही बनाने के लिए खुद परीक्षा में बैठा था कॉन्स्टेबल, कोर्ट ने सुनाई पांच साल की सज़ा

ग्वालियर. एक सिपाही अपने छोटे भाई को सिपाही बनाने के लिए उसकी जगह परीक्षा में बैठ गया. एक ही नाम से दो-दो जगह परीक्षा देने पर जांच हुई तो मामला खुल गया. सिपाही अपने भाई को वर्दी तो नहीं पहना पाया, उल्टे खुद ही भाई सहित जेल पहुंच गया. ग्वालियर जिला अदालत ने 2012 के व्य़ापम भर्ती मामले में फर्जीवाड़ा करने वाले दो सगे भाईयों को पांच-पांच साल की सज़ा सुनाई है. सज़ा देने के बाद कोर्ट ने दोनों भाईयों को फौरन जेल भेज दिया है. आरोपी मुरैना जिले के रहने वाले है, इनमें बड़ा भाई सिपाही है.

सब कुछ एक जैसा होने पर फंसा जालसाज

2012 में व्यापम ने आरक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी. 30 नवंबर को हुई परीक्षा में मुरैना जिले में दिनेश कुशवाहा नाम के अभ्यर्थी के एक साथ दो अलग-अलग सेंटर पर परीक्षा दी गई थी. जब कॉपियों की जांच पड़ताल चल रही थी तब दिनेश नाम का अभ्यर्थी एक नहीं बल्कि दो-दो सेंटर से परीक्षा में बैठा. दोनों के माता-पिता का नाम एक ही था, जिला और पता भी एक ही था. ऐसे में एडीजी चयन ने दिनेश कुशवाहा नाम के अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम रोक दिया. मुरैना एसपी को गड़बड़ी की जांच करने के निर्देश दिए. जांच पड़ताल में दोनों भाइयों के थंब इंप्रेशन, फोटो मिसमैच और लाई डिटेक्टर टेस्ट भी सीबीआई के द्वारा कराए गए. मामले का खुलासा होने पर और थाने में दोनों भाइयों पर एफआईआर दर्ज की गई. बाद में सीबीआई ने इस मामले में ग्वालिय़र की विशेष कोर्ट में चालान पेश किया.
सिपाही मुकेश अपने भाई सहित पहुंचा जेल
ग्वालियर जिला अदालत की स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को व्यापम फर्जीवाड़ा मामला की अहम सुनवाई हुई. मुरैना निवासी दिनेश कुशवाहा और उसके आरक्षक भाई मुकेश कुशवाहा को स्पेशल कोर्ट ने पांच-पांच साल की सजा सुनाई, साथ ही दोनों पर 7400 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है. कोर्ट ने पाया कि मुरैना निवासी दिनेश कुशवाहा ने जेएस पब्लिक स्कूल मुरैना और ऑटोनोमस कॉलेज अंबाह में परीक्षा एक साथ परीक्षा दी. जब मामले की जांच हुई तो खुलासा हुआ कि दिनेश ने मुरैना सेंटर से परीक्षा दी थी, जबकि अंबाह सेंटर पर दिनेश के नाम से उसके सगे बड़े भाई मुकेश ने परीक्षा दी थी.

दिनेश की जगह परीक्षा देने वाला मुकेश कुशवाहा उस वक्त आरक्षक की नौकरी कर रहा था, और ग्वालियर के तिघरा थाने में पदस्थ था. इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई. अंतिम सुनवाई के बाद स्पेशल कोर्ट ने दिनेश कुशवाहा और उसके आरक्षक भाई मुकेश कुशवाहा को मामले में दोषी पाया. कोर्ट ने दोनों भाईयों को पांच-पांच साल की सज़ा सुनाते हुए दोनों पर 3700 रुपए का अर्थदंड भी लगाया. कोर्ट ने सज़ा सुनाने के बाद दोनों भाईयों को जेल भेज दिया है.
 

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